Friday, July 26, 2019

शिक्षा की रोशनी से बदलेगा समाज

शिक्षा के प्रसार एवं रोशनी से बढ़कर कोई पुण्य कार्य इस दुनिया में नहीं है यदि आप एक बच्चे को शिक्षित करते हैं तो आप एक परिवार को शिक्षित  करते हैं.  उसके सामाजिक स्तर को उठाने में अपना योगदान देते हैं.  ऐसे ही कुछ उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में तैनात सिपाही गुड्डन कर रही है वह गरीब और बेसहारा बच्चों को पढ़ाने का  नेक काम कर रही हैं. 

 पुलिस विभाग में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद गुड्डन कुछ समय इन बच्चों को पढ़ाने के लिए निकालती हैं और समाज निर्माण में अपना योगदान देती है. 

 उत्तर प्रदेश पुलिस में ऐसे पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी नहीं है जो शिक्षा का अलख जगा रहे हैं यह कर्मचारी शिक्षा के जरिए बदलाव और विकास की मुहिम चला रहे हैं. 


गरीब बच्चों को शिक्षित करना और उन्हें सही मार्ग दिखाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी शायद ये बात भली-भातिं जानते हैं। यहीं वजह है कि प्रदेश के आलाधिकारी सहित कई पुलिसकर्मी गरीब नौनिहालों के भविष्य को संवारने की खातिर हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कई पुलिस अधिकारियों ने गरीब बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की रौशनी फैलाने के लिए अपने खर्चे पर उनकी पढ़ाई की व्यवस्था कराई है तो वहीं कई पुलिसकर्मी अपने व्यस्त ड्यूटी में से कुछ समय निकालकर खुद झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों को अक्षर ज्ञान दे रहे हैं। 
महिला सिपाही गरीब बच्चों की जिंदगी में फैला रही शिक्षा का उजियारा


बुलन्दशहर के थाना ख़ुर्जा देहात क्षेत्र के थाने में तैनात महिला सिपाही गुड्डन चौधरी न केवल ईमानदारी से अपनी नौकरी कर रही हैं बल्कि मानवता की मिसाल कायम करते हुए पुलिस की व्यस्तम नौकरी में से कुछ घंटे निकालकर उन गरीब बच्चों की जिंदगी से अशिक्षा का अंधकार मिटा रही हैं जो परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से शिक्षा से महरूम रह जाते हैं। कांस्टेबल गुड़्डन चौधरी ड्यूटी से आने के बाद सड़क किनारे क्लास लगाकर नियम से गरीब बच्चों को पढाती हैं। गुड्डन चौधरी बच्चों को ना सिर्फ अक्षर का ज्ञान दे रही हैं बल्कि अपने वेतन का 20-30 फीसदी हिस्सा बच्चों को कॉपी ,किताबें और पेंसिल आदि दिलाने में भी खर्च करती हैं।। यही वजह है कि सड़कों पर कूड़ा बीनने वाले बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही कांस्टेबल गुड्डन चौधरी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। वे यहां ‘पुलिस वाली मैडम’ के नाम पर लोकप्रिय हो चुकी हैं। जिन गरीब परिवारों के बच्चों को ‘पुलिस वाली मैडम’ शिक्षित कर रही हैं वे उनका शुक्रिया अदा करते नहीं थकते हैं। 


महिला पुलिसकर्मी गुड्डन चौधरी हाथरस की रहने वाली हैं। करीब 6 महीने पहले ही थाना खुर्जा देहात में उनकी तैनाती हुई था। यहां आकर उन्होने देखा कि गरीबी की वजह से कुछ मासूम शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। ये देखकर उन्हे काफी दुख हुआ और फिर उन्होने ठान लिया कि वे इन बच्चों को शिक्षित करेंगीं। फिर क्या था उन्होने शुरू कर दी अपनी पाठशाला। शुरू में वह कुछ बच्चों को पढ़ाया करती थी लेकिन बाद में कारवां बढ़ता गया और आज आलम ये है कि अच्छी खासी संख्या में बच्चे उनकी पाठशाला में पढ़ने के लिए आते हैं। बच्चे भी ‘पुलिस वाली मैडम’ से खासे घुल मिल गए हैं। कई बार तो गुड्डन बच्चों के साथ हंसते-गाते, झूमते भी देखी जाती हैं। गुड्डन की इस निस्वार्थ सेवा की उनके महकमे के अधिकारी भी काफी प्रशंसा कर रहे हैं।साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों से भी ड्यूटी के बाद बचे हुए समय में से कुछ वक्त निकालकर निर्धन बच्चों में शिक्षा का उजियारा फैलाने की अपील कर रहे हैं।
यह पूछने पर कि पुलिस कॉन्स्टेबल के रूप में व्यस्त दिनचर्या के बावजूद बच्चों को अलग से पढ़ाने के लिए आखिर वे कैसे समय निकाल पाती हैं तो गुड्डन कहती हैं, 'मैं सिर्फ अपने समय का एक छोटा सा हिस्सा इन बच्चों को दे रही हूं। सिर्फ शिक्षा ही है, जिससे इनका भविष्य संवर सकता है। वे कहती हैं कि गरीब बच्चे भी समान प्रगति के लायक हैं। ‘हम सभी को कम आय वाले परिवारों से आए निर्धन बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने सांसारिक जीवन से कुछ घंटे अवश्य निकालने चाहिए।' वे बताती हैं कि उन्हें बच्चों को पढ़ाने का हमेशा से ही काफी शौक रहा है और मथुरा में भी वह इसी तरह बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी लेती थीं। गुड्डन ने बताया कि उनकी प्राथमिकता रहती है कि बच्चों का सरकारी स्कूल में एडमिशन भी करा पाए। गुड्डन ने बताया कि उन्होने अब इन बच्चों के लिए आधार कार्ड के लिए आवेदन किया है जो एक सरकारी स्कूल में प्रवेश पाने के लिए प्राथमिक कदम है।


एसएसपी इटावा ने गरीब बच्चे का स्कूल में एडमिशन कराकर दिलाई यूनिफार्म और किताबें
साल 2012 के आईपीएस अधिकारी और इटावा के एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा अपनी ईमानदारी और तेज तर्रार छवि के लिए जाने जाते हैं। इस सख़्त मिजाज़ अफ़सर को अक्सर गरीब, मज़बूरों की मदद करते भी देखा जा सकता है। कुछ दिन पहले भी एसएसपी ने  इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक गरीब बच्चे का न केवल स्कूल में दाखिला कराया था बल्कि उसे वर्दी और किताबें भी दिलाई। दरअसल एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा मार्निंग वॉक के दौरान कंपनी बाग के पास से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होने एक दिव्यांग मेहराज अली को अपनी ट्राई साइकिल पर बैठकर गुब्बारे बेचता देखा था। उसके साथ उसका 10 वर्षीय बेटा सोहेल भी गुब्बारे बेचने में मदद कर रहा था। लाचार और गरीबी के मारे बाप-बेटे की दो रूपये कमाने की जद्दोजहद देखकर एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा खुद को रोक न पाए और दिव्यांग के पास जाकर उसका हाल-चाल पूछने लगे। पहले तो दिव्यांग मेहराज, एसएसपी को देखकर डर सा गया। लेकिन एसएसपी के नम्र व्यवहार को देखकर उसके मन से डर निकल गया। इस दौरान एसएसपी ने दिव्यांग के बेटे को अपने पास बुलाया और उससे बात करने लगे। उन्होने उससे उसकी पढाई के बारे में पूछा तो बच्चे ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से उसकी पढ़ाई कक्षा तीन के बाद ही छूट गई थी। बच्चे सोहेल की ये बात सुनकर एसएसपी उसे अपने साथ लेकर पुलिस मॉर्डन विद्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने प्रिंसिपल से बात कर कक्षा चार में दिव्यांग के बेटे का दाखिला करवा दिया। इतना ही नहीं एसएसपी ने बच्चे को यूनीफार्म, कॉपी किताबें दिलवाकर उसके भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास भी किया। इसके साथ ही एसएसपी ने मानवता की मिसाल कायम करते हुए दिव्यांग के लिए आवास की व्यवस्था करवाने की खातिर डीएम से सिफारिश भी कर डाली। जिसके बाद डीएम जेबी सिंह ने दिव्यांग के लिए सरकारी आवास की व्यवस्था करवाने का आश्वासन दिया है। 
 एसएसपी अजय साहनी ने मृतक अनित गुर्जर के तीन बच्चों को लिया गोद
 मेरठ के एसएसपी अजय साहनी अपनी ईमानदारी और अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए तो जाने ही जाते हैं। उनके सराहनीय कार्य भी महकमे को अक्सर फ़ख्र कराने का मौका देते रहते हैं।  मेरठ के बली गांव में भी एक प्रधान के बेटे की हत्या के बाद शोकसभा में पहुंचे एसएसपी अजय साहनी ने बेहद सराहनीय कार्य करते हुए हर किसी का दिल छू लिया। दरअसल यहां के  परीक्षितगढ़ के बली गांव में प्रधान के बेटे अनित गुर्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अनित गुर्जर के घर पर शोक सभा का आयोजन हुआ तो एसएसपी अजय साहनी भी पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हे इस गम से उबरने के लिए ढांढस बंधाया। इस दौरान एसएसपी ने मृतक अनित के तीन मासूम बच्चों के चेहरों की उदासी देखी तो उनसे रहा न गया। उन्होने फौरन तीनों को गोद लेकर उनकी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी उठाने की बात कही। साथ ही परिवार को हर संभव मदद देने का भी भरोसा दिया। एसएसपी की बात सुनकर हर कोई उनकी तारीफ करने लगा और कहने लगा कि पुलिस महकमे में ऐसे नेक अफसर बहुत कम देखने को मिलते हैं जो दूसरे की तकलीफ को अपना समझते हैं। 
 
चौकी इंचार्ज ने तीन बच्चियों को गोद लेकर पेश की मानवता की मिसाल
 
उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे के कुछ पुलिसकर्मी आम लोगों के ज़ेहन में ख़ाकी की धूमिल हुई छवि को निरंतर साफ बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। खाकी के रुतबे को बुलंद रखने में एक योगदान हरदोई के रेलवेगंज चौकी इंचार्ज राहुल सिसौदिया ने भी दिया है। दरअसल खजांची टोला निवासी एक परिवार की माली हालत बेहद खस्ता है। इसी कारण परिवार अपनी तीन बच्चियों की शिक्षा को पूरा कराने में असमर्थ था। परिवार की बेटियां चाय के गिलास और लिफ़ाफ़े बेचकर अपनी पढ़ाई पूरा करने की कोशिश कर रही  थी। चौकी इंचार्ज राहुल सिसौदिया को इसकी जानकारी मिली तो उन्होने बच्चियों की पढ़ाई को ज़रुरी समझते हुए अप्रैल महीने में तीनों को गोद ले लिया और उनकी बारहवीं तक की पढ़ाई का खर्च उठाने की ज़िम्मेदारी भी अपने कंधों पर ले ली। जिस समय उन्होंने बच्चियों को गोद लिया था उस समय भी चौकी इंचार्ज ने उन्हें कॉपी,स्कूल बैग समेत जरूरत की सभी चीजें दिलाई थीं। गौरतलब है कि चौकी इंचार्ज राहुल सिसौदिया इससे पहले भी कई जरुरतमंद लोगों की मदद कर चुके हैं। उनके इस मानवीय कार्य की पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है।
यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर ने ली गरीब बच्ची की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी
कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका ख़ुदा होता है और ऐसे में ख़ुदा इंसानी रूप लेकर मदद के लिए सामने आ जाते हैं। लखनऊ के न्यू हैदरगंज निवासी अमरनाथ के लिए भी इंस्पेक्टर महेश पाल सिंह ख़ुदा से कम नहीं हैं जो उनकी परेशानी समझकर मदद के लिए आगे आए। दरअसल अमरनाथ  सआदतगंज थाने के पास चाय बेचकर परिवार का पालनपोषण करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ ही मुश्किल से होता है ऐसे हालातों में वे अपनी बेटी को आठवीं के बाद आगे नही पढ़ा पाए। इस बात की जानकारी जैसे ही सआदतगंज थाने के इंस्पेक्टर महेश पाल सिहं को लगी उनका दिल पसीज गया और उन्होंने बिटिया माही की मदद के लिए तुरंत हाथ आगे बढ़ा दिए। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए इंस्पेक्टर महेश पाल सिंह ने चाय वाले की बेटी की पढ़ाई का पूरा ज़िम्मा अपने कंधों पर ले लिया। जिसके बाद हर कोई इंस्पेक्टर की तारीफ करते नहीं थक रहा है। 
 
 
यूपी पुलिस के अधिकारी व पुलिसकर्मी यकीनन मानवता की मिसाल कायम कर रहे हैं। उनकी निस्वार्थ भाव से की जा रही ये सेवा न केवल कई बच्चों का भविष्य संवारने में मददगार साबित हो सकती है बल्कि उन नौनिहालों को शिक्षा देकर या शिक्षा की व्यवस्था कराकर वे देश के भविष्य को भी उज्ववल बनाने में सार्थक भागीदारी दे रहे हैं। यूपी पुलिस के इन नेक अधिकारियों व कर्मियों की तरह ही अगर आज हर भारतीय किन्ही दो बच्चों को भी शिक्षित करने का जिम्मा उठा ले तो यकीन मानिए देश को विश्व गुरू बनने से कोई नही रोक पाएगा।

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