Friday, October 26, 2018

ट्रेन की चपेट में आकर एक युवक की मौत

ट्रेन की चपेट में आकर एक युवक की मौत

गाज़ियाबाद-थाना कविनगर क्षेत्र के गुलधर फाटक के पास सुबह ट्रेन की चपेट में आकर एक युवक की मौत हो गई। वहीं दूसरी तरफ रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर 4 पर रेल हादसे में एक युवती जख्मी हो गई।युवती अलीगढ की रहने वाली है।कविनगर पुलिस को गुलधर रेलवे फाटक के आस सुबह एक युवक का शव पड़े होने की सूचना मिली थी।क्षेत्राधिकारी द्वितीय आतिश कुमार ने जानकारी देते हु बताया कि, मरने वाले युवक की पहचान लोकेश पुत्र चरण सिंह के रूप में हुई है। युवक संजयनगर का निवासी है।परिजनों का कहना है कि, कुछ दिनों से वह मानसिक तनाव में था, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या कर ली। युवक पेशे से चित्रकार था। सुनने में यह भी आरहा है कि युवक की पत्नी कुछ दिन से अपने मायके में ही रह रही है। जिससे युवक नशे का आदि हो गया था, नशे की वजह से दंपत्ति के बीच अक्सर लड़ाईयां होती रहती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

*बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी को मिला धमकी भरा पत्र

*बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी  को मिला धमकी भरा पत्र*

अयोध्या के विवादित स्थल मामले में बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी को धमकी भरा पत्र मिला है, धमकी पत्र में कहा गया है कि वे बाबरी मस्जिद पर अपनी दावेदारी छोड़ दें, वरना उन्हें भारत की सीमा से बाहर कर दिया जाएगा। पत्र मिलते ही इकबाल अंसारी की शिकायत पर फैजाबाद पुलिस ने अमेठी की पुलिस से संपर्क किया। जिस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने पत्र में लिखे नाम और पते के आधार पर आरोपी का पता लगाया था। आरोपी की पहचान सूर्य प्रकाश सिंह के रूप में हुई है जिसे अमेठी पुलिस ने फैजाबाद पुलिस को सौंप दिया है। गौरतलब है कि मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी को बुधवार शाम कोरियर से एक धमकी भरा पत्र प्राप्त हुआ था। इकबाल ने जब पत्र खोला तो उसमें चेतावनी भरे लहजे में लिखा हुआ था कि अपने समस्त विवादित स्थानों को मुक्त कर दीजिए ताकि संसार को बहुत अच्छा संदेश जाए सब हंसी खुशी के साथ रह सकें। पत्र में आरोपी ने लिखा था कि इकबाल अंसारी के पैरवी न छोड़ने पर उन्हें सीमा पार भगा दिया जाएगा।

वहीं अयोध्या बाबरी मस्जिद पक्षकार इक़बाल अंसारी ने अपनी जान को खतरा बताया है, उनका कहना है की कोरियर के माध्यम से धमकी भरा पत्र मिला था। इकबाल अंसारी ने सुरक्षा बढ़ाये जाने की मांग की है, उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही है अगर उनको कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार सरकार होगी। इकबाल अंसारी के शिकायत के बाद से ही पुलिस सक्रिय हो गई और यूपी के अमेठी जिले में उसे ढूंढ निकाला।

मेरठ : दरोगा मारपिट मामला में भाजपा पार्षद गिरफ्तार*

*मेरठ : दरोगा मारपिट मामला में भाजपा पार्षद गिरफ्तार*

मेरठ। उत्तर प्रदेश में मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में एक रेस्तरा के मालिक एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पार्षद को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में दरोगा को भी लाइन कर दिया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार ने आज यहां बताया कि हाईवे स्थित एक रेस्तरां में शुक्रवार रात मोहिदीनपुर के चौकी प्रभारी सुखपाल सिंह अपनी महिला मित्र के साथ गये थे। वहां पर किसी बात को लेकर उनका विवाद हो गया। इस बीच रेस्तरां के मालिक तथा भाजपा पार्षद मनीष चौधरी ने दरोगा के साथ मारपीट की।
उन्होने बताया रेस्तरां के मालिक को दरोगा के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वह वार्ड नंबर 40 से भाजपा के पार्षद है। दरोगा को ड्यूटी में कर्तव्यों का पालन न करने के आरोप लाइन हाजिर कर दिया है। उन्होने कहा यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने से भाजपा तथा राज्य पुलिस की छवि खराब हुई है।

सीबीआई विवादः सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्तों में जांच के दिए आदेश, अंतरिम चीफ नहीं ले पाएंगे नीतिगत फैसला*

*सीबीआई विवादः सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्तों में जांच के दिए आदेश, अंतरिम चीफ नहीं ले पाएंगे नीतिगत फैसला*

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में चल रही उठापठक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार काे आलोक वर्मा की याचिका पर फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजते हुए कहा है कि सीवीसी आलोक वर्मा के खिलाफ दो हफ्तों में जांच पूरी करें।

सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज के सुपरविजन में इस मामले की जांच होगी। वहीं ऐक्टिंग सीबीआई चीफ पर भी बड़ा निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस दौरान कोई बड़ा (नीतिगत) फैसला नहीं लें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागेश्वर राव ने अबतक जो फैसले लिए हैं, उसे सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की तरफ से सीनियर ऐडवोकेट फली एस नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई निदेशक को उनके अधिकारों से वंचित करने का आदेश दिया। केंद्र ने उसी दिन सीबीआई चीफ का चार्ज लेने के लिए दूसरे शख्स को नियुक्त कर दिया।

*एनडी तिवारी की आखिरी विदाई  में सीएम योगी की हंसी  रोके नहीं रुक रही...-*

हाल ही में एक वीडियो सामने आया था जिसमें भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान मंच पर मौजूद बीजेपी सरकार के दो मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर ठहाके लगाते नजर आए। वहीं अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी के अंतिम संस्कार से पहले सभा में कथित तौर पर हंसते हुए देखा गया है। सोशल मीडिया पर भी ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है यूपी सीएम योगी एनडी तिवारी के अंतिम संस्कार से पहले हंसी मजाक करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान सीएम योगी के साथ बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन अगली पंक्ति में, जबकि यूपी के मंत्री मोहसिन रजा और आशुतोष टंडन उनके पीछे बैठे थे। वहीं एनडी तिवारी का पार्थिव शरीर सामने तिरंगे में लिपटा हुआ था।

Wednesday, October 24, 2018

पहला आम चुनाव

पहला आम चुनाव

हिंदुस्तान का पहला आम चुनाव कई चीजों के अलावा एक विश्वास का विषय था एक नया नया आजाद हुआ मुल्क सार्वभौमिक मताधिकार के तहत सीधे तौर पर अपने हुक्मरानों के चुनने जा रहा था. इसने वह रास्ता अख्तियार नहीं किया जो पश्चिमी देशों ने अख्तियार किया था वहां पहले कुछ संपत्ति शाली तबकों को ही मतदान का हक मिला था बहुत बाद तक वहां कामगारों और महिलाओं को मतदान हक्क नहीं मिला था लेकिन हिंदुस्तान में ऐसा नहीं हुआ मुल्क 1947 में आजाद हुआ और इसके 2 सालों के बाद यहां एक चुनाव आयोग का गठन कर दिया गया.
मार्च 1950 में सुकुमार सेन को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया उसके अगले ही महीने जनप्रतिनिधि कानून संसद में पारित कर दिया गया इस कानून को पेश करते हुए संसद में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह उम्मीद जाहिर की कि साल 1951 के बसंत तक चुनाव करवा लिए जाएंगे.
इस मामले में नेहरू की जल्दबाजी समझी जा सकती थी लेकिन जिस व्यक्ति के जिम्मे चुनाव करवाने का काम था उसके लिए यह मुश्किल काम था यह एक दुर्भाग्य जनक बात है कि हम सुकुमार सेन के बारे में बहुत नहीं जानते उन्होंने भी कोई संस्मरण या कोई दस्तावेज अपने पीछे नहीं छोड़ा जो हमें उनके बारे में ज्यादा बता सके सुकुमार सेन का जन्म 18 से 99 में हुआ था और उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज और लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी लंदन यूनिवर्सिटी में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था इसके बाद उन्होंने 1921 में इंडियन सिविल सर्विस जॉइन कर ली और कई जिलों में बतौर न्यायाधीश उनकी बहाली की गई बाद में वे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव भी बने जहां से उन्हें प्रतिनियुक्ति पर मुख्य चुनाव आयुक्त बनाकर भेज दिया गया.
शायद सेन के अंतर का वह गणितीय ही था जिस ने नेहरू को कुछ दिन इंतजार करने के लिए कहा था क्योंकि भारत सरकार के किसी भी अधिकारी के पास इतना कठिन और विशाल काम नहीं था जो सुकुमार सेन को सौंपा गया था जरा हम यहां मतदाताओं की तादाद पर गौर करें उस चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या 17 करोड़ 60 लाख थी जिनकी उम्र 21 साल या उससे ऊपर थी और जिसमें से 85 फ़ीसदी ना तो पढ़ सकते थे और ना ही लिख सकते थे उनमें से हर एक की पहचान करनी थी उसका नाम लिखना था और उन्हें पंजीकृत करना था मतदाताओं का निबंधन तो महज पहला कदम था क्यों की समस्या यह थी कि अधिकांश अशिक्षित मतदाताओं के लिए पार्टी प्रतीक चिन्ह मतदान पत्र और मत पेटी किस तरह की बनाई जाए इसके बाद चुनाव के लिए मतदान केंद्र का भी चयन किया जाना था साथ ही इमानदार और सक्षम मतदान अधिकारी की भी नियुक्ति करनी थी इसके अलावा आम चुनावों के साथ ही राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव होने थे इस काम में सुकुमार सेन के साथ विभिन्न राज्यों में मुख्य चुनाव अधिकारी भी काम कर रहे थे जिनमें से अधिकांश अमूमन आईसीएस ऑफिसर ही थे.
आखिरकार सन 1952 के शुरुआती महीनों में चुनाव करवाया जाना तय हुआ हालांकि कुछ गुरु और सुदूर भर्ती जिलों में इस काम को पहले अंजाम दिया जाना था उस वक्त एक अमेरिकन पर्यवेक्षक में सही ही लिखा कि चुनाव में इस्तेमाल किए जाने वाले सामान और उपकरण बहुत बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं.
सुकुमार सेन के उद्यम को समझने में कुछ आंकड़े हमारी मदद कर सकते हैं कुल मिलाकर 4500 सीटों पर चुनाव होने जिनमें करीब 500 संसद के लिए थे और शेष प्रांतीय विधानसभाओं के थे इस चुनाव में 224000 मतदान केंद्र बनाए गए और वहां 2000000 इस्पात की मत पेटियां भेजी गई इन बेटियों को बनाने में 8200 टन इस्पात खर्च हुआ. 6 महीने के अनुबंध पर 16500 क्लर्क बहाल किए गए ताकि मतदाता सूची क्षेत्र व ढंग से टाइप किया जा सके और उनका मिलान किया जा सके मतदान पत्रों को छापने में करीब 380000 कागज के रिम इस्तेमाल किए गए.
चुनाव कार्य को संपादित करने के लिए 56 हजार पीठासीन अधिकारियों का चुनाव किया गया और इनकी सहायता के लिए 280000 सहायक बहाल किए गए इस चुनाव में सुरक्षा के लिए 224000 पुलिस के जवानों को बहाल किया गया ताकि हिंसा और मतदान केंद्रों पर गड़बड़ियों को रोका जा सके.

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