उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के पतन की सबसे बड़ी वजह बिगड़ी कानून व्यवस्था आंकी गई थी। कानून व्यवस्था को ही मुद्दा बनाकर योगी आदित्यनाथ सरकार उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ हुई थी। कुर्सी संभालने के पहले ही दिन सीएम योगी आदित्यानाथ ने जनता को भरोसा दिया था कि वह उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करेंगें। मुख्यमंत्री ने अपने पहले संबोधन में साफ कहा था कि उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के लिए एक ही जगह बची है और वह है जेल। उनका कहना था, ‘जो जेल में नहीं होंगे वे या तो उत्तर प्रदेश से बाहर होंगे या पुलिस की गोली का शिकार होंगें।’लेकिन मौजूदा हालात देखकर तो सीएम के ये सभी बड़े बोल झूठे साबित हो रहे हैं। दरअसल प्रदेश में पिछले काफी दिनों से कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बेख़ौफ बदमाश ताबड़तोड़ वारदातें कर दहशत फैला रहे हैं। पुलिस का इक़बाल पूरी तरह ख़त्म हो चुका है। आलम ये है कि पुलिस अभिरक्षा से ही बंदी सिपाहियों की हत्या कर फरार हो रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल में 17 जुलाई को कुछ ऐसा ही वाकया पेश आया था जिसने हड़कंप मचा दिया था। दरअसल मुरादाबाद जिला जेल से एक वैन पर 24 कैदी चंदौसी में दिवानी न्यायालय में पेशी पर लाये गये थे। पेशी के बाद सभी कैदियों को लेकर वैन वापस जा रही थी जिन पर नजर रखने के लिये उनके साथ दो हथियारबंद सिपाही बृजपाल सिंह और हरेंद्र सिरोही भी सवार थे। कैदी वैन अभी चंदौसी से दो किलोमीटर ही दूर निकली थी कि तभी वैन में सवार तीन बंदियों बहजोई थाना इलाके के रम्पुरा गांव निवासी शकील और कमल तथा बहजोई के ही भरतपुर निवासी धर्मपाल ने अचानक वैन में मौजूद सिपाहियों ब्रजपाल व हरेंद्र की आंख में मिर्ची पाउडर झोंक दिया। सिपाही कुछ समझ पाते इससे पहले वे ग्रिल टेढ़ी करके भागने की कोशिश करने लगे। कैदियों को ऐसा करते देख दोनों सिपाहियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बदमाशों ने उन पर तमंचों से कई फायर कर दिए और घायल सिपाही की राइफल छीन ली। इधर चलती कैदी वैन में फायरिंग की आवाज सुनकर चालक ने वैन रोक दी और आगे बैठे एक दरोगा व एक सिपाही फौरन उतरकर पीछे की तरफ भागे। इस बीच तीनों कैदियों ने वैन का दरवाजा लात मारकर तोड़ दिया और शकील,कमल व धर्मपाल वैन से उतरकर फायरिंग करते हुए जंगल में भाग गए। बदमाश सिपाही से छीनी गई एक राइफल भी अपने साथ ले गये थे। इधर गोली लगने से संभल रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सिपाही हरेंद्र पुत्र शिवचरन निवासी चंदूपुरा कोतवाली देहात,बिजनौर और ब्रजपाल पुत्र कोमल सिंह निवासी तेली नंगला थाना नांगल,बिजनौर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
दो सिपाहियों की हत्या कर तीन बदमाशों के फरार हो जाने की खबर से पुलिस में हड़कम्प मच गया था। जनपद के सभी थानों की पुलिस को सतर्क कर मुख्य मार्गो पर चैकिंग में जुटा दिया गया जबकि पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने क्राइम ब्रांच टीम के साथ मौके पर पहुंचकर बदमाशों की तलाश में कांबिंग शुरु करा दी। रामपुर,मुरादाबाद,बदायूं व अमरोहा की पुलिस को भी एलर्ट कर दिया गया। यह इतनी बड़ी वारदात थी कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे थे। जिसके बाद यूपी के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों, एसटीएफ और जिला पुलिस को वारदात के खुलासे के लिए लगाया गया। जिला स्तर पर दस टीमें बनीं। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश, मुरादाबाद के आईजी रमित शर्मा ने संभल में ही डेरा डाल दिया और एडीजी अविनाश चंद्र भी पल-पल की खबर ले रहे थे। इस दौरान पूरे जोन की पुलिस के साथ एसटीएफ की टीमें तीनों हत्यारोपियों को तलाश रहीं थीं। यही नहीं इन पर ढाई-ढाई लाख का इनाम भी घोषित किया गया। लेकिन घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल रही थी, उसके बावजूद पुलिस टीमों की घेराबंदी इनके खिलाफ जारी थी।
पुलिस की टीमों ने इस तरह से घेराबंदी की कि बदमाश हाथ आ जाए। इसके बाद तेजतर्रार अमरोहा के एसपी विपिन ताड़ा की अगुवाई में पुलिस ने बदमाशों को वारदात को अंजाम देने के 75 घंटे के भीतर ही अमरोहा जिले में संभल जनपद की सीमा से लगे शेरगढ़ के जंगलों में घेर लिया था। इस दौरान हुई मुठभेड़ में ढाई लाख के इनामी बदमाश कमल को गोली लगी और पुलिस ने उसे तत्काल अमरोहा के जिला अस्पताल भेजा जहां पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस अन्य दो बदमाशों को भी पकडने के लिए दूसरे प्रांतों में भी भागदौड कर रही है और पुलिस को पूरी उम्मीद है कि जल्दी ही दोनो हत्यारोपी पकड़े जाएंगें
वैसे बता दें कि एसपी विपिन ताड़ा को कुख्यात अपराधियों को दबोचने में महारत हासिल है। इसलिए उन्हे इस मिशन की भी कमान सौंपी गई थी और उम्मीदों के मुताबिक उन्होने घटना के 75 घंटों के भीतर एक हत्यारोपी को मुठभेड़ में मार गिराया। गौरतलब है कि एसपी विपिन ताड़ा प्रदेश के चुनिंदा तेजतर्रार अधिकारियों में शामिल हैं। उनकी जहां भी तैनाती रही है वहां उन्होने अपराधियों को नाको चने चबवा दिए। आईपीएस विपिन ताडा मूल रूप से जोधपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं। वे साल 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। विपिन ताडा मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सतपाल सिंह के दामाद हैं। आईपीएस की ट्रेनिंग के दौरान विपिन ताडा आगरा और गाजियाबाद में तैनात रहे, यहां उन्होने अपने काम का लोहा मनवा दिया। गाजियाबाद के बाद उन्हे एसपी सिटी आजमगढ़ के तौर पर चार्ज दिया गया। आजमगढ़ में रहते हुए उन्होने न केवल अपराध और अपराधियों का खात्मा किया बल्कि अपने मृदु स्वभाव की वजह से जनता के दिलों में भी जगह बनाई। आजमगढ़ की जनता आज भी इस आईपीएस अधिकारी की तारीफ करते नहीं थकती है। आजमगढ़ के बाद विपिन ताडा को एसपी सिटी इलाहाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्हे रामपुर का कप्तान बनाया गया और वर्तमान समय में वे अमरोहा में बतौर एसपी की जिम्मेदारी संभालते हुए अपराधियों के होश फाख्ता कर रहे हैं। एसपी विपिन ताडा का मानना है कि अपराधियों को इस तरह से सबक सिखाया जाना चाहिए कि वे दोबारा अपराध करने से ख़ौफ खाएँ।
2 पुलिस कर्मचारियों की कैदियों द्वारा वैन में हत्या कर फरार हो जाने की घटना ने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया. बिना जानकारी के कैदी इतनी बड़ी साजिश नहीं रच सकते थे. कैदियों के फरार होने के बाद पुलिस विभाग को इन्हें ढूंढने में जितनी मशक्कत करनी पड़ी वह अपने आप में हैरान कर देने वाली है.
काफी मेहनत के बाद एक कैदी पुलिस के हाथ लग गया जिसे एनकाउंटर में पुलिस ने एसपी विपिन टांडा के नेतृत्व में मार गिराया.
लेकिन यह घटना पुलिस विभाग में व्याप्त कमजोरी एवं भ्रष्टाचार को उजागर करता है. सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत ही चिंता का विषय है इस पर सख्त कार्यवाही की आवश्यकता है
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