Monday, December 28, 2020

गाजियाबाद से करणी सेना की धमक कहां तक ​​सुनी गई

अजय शर्मा की कलम से 

गाजियाबाद में करणी सेना की धमक से कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं कि राष्टीय कार्यसमिति की बैठक के लिए गाजियाबाद को क्यों चुना। इसके राजनीतिक मायने क्या हैं। यहां करणी सेना कौन सी जमीन बना रही है। करणी सेना की इस धमक को कहां तक महसूस किया जाएगा।  

करणी सेना ने गाजियाबाद में अपनी कार्यसमिति की बैठक आयोजित की। जिसमें पूरे देश से उसके 22 प्रदेश अध्यक्ष और राष्टीय पदाधिकारी शामिल हुए। करणी सेना के संस्थापक और राष्टीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत दिखाई। करणी सेना ने अपने सदस्यों की संख्या 25 लाख बताई। जो दिन रात हिन्दुत्व, सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे है। सूरजपाल अम्मू कहते हैं कि हम सिर्फ राजपूतों का संगठन नहीं हैं बल्कि हिन्दुत्व की मशाल जलाए रखने वाला एक उर्जावान संगठन हैं। सूरजपाल अम्मू के संबोधन में भीम आर्मी, मायावती, अखिलेश यादव, औवेसी, ओमप्रकाश राजभर और ममता बनर्जी टारगेट पर रहीं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में प्रधानमंत्री का संबोधन और उसकी खत्म हो चुकी लीज भी करणी सेना के अध्यक्ष के संबोधन का हिस्सा रहे। उन्होंने गाजियाबाद के नाम पर चुटकी लेते हुए कहा कि इसका कोई और नाम रखा जाना चाहिए। श्यामनगर, रामनगर, शिव नगर आदि कुछ भी रख दिया जाना चाहिए। बॉलीवुड में अश्लीलता को आड़े हाथों लिया। महिला शक्ति की राष्टीय अध्यक्ष कीर्ती राठौर ने इस संगठन को महिलाओं के मान सम्मान की रक्षा और रानी लक्ष्मीबाई को एक प्रेरणास्रोत बताया। कीर्ति राठौर कहती हैं कि हम एक सामाजिक संगठन हैं। हमारा राजनीति से कोई सरोकार नहीं हैं। लेकिन पथभ्रष्ट और जातिगत राजनीति का हम विरोध करते हैं। जिला गाजियाबाद महिला शक्ति अध्यक्ष वंदना सिंह मानती हैं कि सनातन संस्कृति की रक्षा सर्वोपरि है। महिलाएं लव जेहादियों के निशाने पर हैं। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। 

कार्यसमिति की बैठक में लव जेहाद कानून को समाज के विकास के लिए उचित बताने वाले सूरजपाल अम्मू ने किसान एक्ट को किसानों के हित में बताया और उसका समर्थन किया। करणी सेना आने वाले समय में मथुरा और बनारस में धर्म और संस्कृति को केन्द्र में रखकर कुछ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। 

यह कार्यसमिति की बैठक सामाजिक और राजनीतिक रूप से उत्तर प्रदेश में एक गहरा असर जरूर छोड़ेगी। करणी सेना की वजह से आने वाले कुछ महीने यूपी के लिए अहम होंगे। 

Monday, May 18, 2020

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातियों का समीकरण

वोट बैंक के लिहाज़ से देखें तो सबसे बड़ा ख़तरा सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को है, जिसका मुस्लिम वोट बैंक खतरे में नज़र आ रहा है। यूपी में मुसलमानों की संख्या करीब 17 प्रतिशत है, जिन्होंने बीते 15 सालों से सपा का हाथ थाम रखा है। बीते विधानसभा चुनाव में भी सपा को 60 प्रतिशत से ज़्यादा मुस्लिम वोट मिले थे, लेकिन मुज़फ्फरनगर दंगे व दादरी कांड के बाद मुस्लिम सपा से खफा हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर दंगे के 6 माह बाद वहां लोगों से मिलने गए थे, जिसकी मुस्लिम समुदाय ने तीखी आलोचना की थी। यूपी चुनाव को लेकर हुए सभी सर्वे में मायावती की बीएसपी को सबसे आगे बताया गया है। मुस्लिम समुदाय की खासियत यह है कि इनका वोट ज़्यादा बंटता नहीं है।

वहीं, बीजेपी को यूपी में आने से रोकने के लिए मुस्लिम समुदाय उस पार्टी को वोट देगी जो उनको कड़ा मुकाबला दे सके। वर्तमान स्तिथि में बीएसपी सपा से ज़्यादा मज़बूत लग रही है और इस बात के पूरे आसार हैं कि मुस्लिम समुदाय सपा का हाथ छोड़कर बहनजी का दामन थाम लें। अगर ऐसा हुआ तो बीएसपी को 70 सीटों में फ़ायदा होगा, जहां मुस्लिम वोट अहम रोल अदा करता है, जबकि सपा को इन 70 सीटों में नुकसान झेलना पड़ सकता है। यूपी में दलितों की आबादी 20 प्रतिशत हैं, जिनका वोट एकतरफा मायावती को जाता है। दलित वोट के साथ-साथ अगर अधिकांश मुस्लिम वोट भी मायावती को मिला तो बीएसपी को यूपी चुनाव में नंबर एक पार्टी बनने से कोई नहीं रोक सकता है। वहीं, सपा के पास महज़ अपना परंपरागत 9 प्रतिशत यादव वोट है जो किसी और पार्टी  को नहीं जाता है, लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए यह काफी नहीं हैं। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सपा से लाखों युवा जुड़े हैं, लेकिन हाल ही में हुई मथुरा हिंसा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण पार्टी को इसका ज़्यादा फ़ायदा मिलना मुश्किल ही नज़र आ रहा है।

इस चुनाव को सबसे दिलचस्प बनाती है बीजेपी... जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के दम पर 80 में से 71 सीटें जीती थी। हालांकि 1991 में जहां यूपी में बीजेपी को 221 विधानसभा सीटें मिली थीं, वह 2012 में घटकर महज़ 47 ही रह गईं। दिल्ली और बिहार चुनाव में करारी हार के बाद मोदी और पार्टी को मज़बूत बनाने के लिए यूपी का सहारा है, लेकिन सीएम प्रत्याशी व चुनावी एजेंडा जैसे अहम मुद्दों पर एकमत नहीं बना पा रही है। बीजेपी का यूपी चुनाव में हिंदुत्व व व ध्रुवीकरण मुख्य हथियार होगा , जिसका फ़ायदा पार्टी को पश्चिमी यूपी में मिलेगा। पश्चिमी यूपी में 27 ज़िले आते हैं, जहां हिन्दुओं की संख्या 73 प्रतिशत है, जिसमें जाट और गुर्जर भी आते हैं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में वोट मिले थे। मुज़फ्फरनगर दंगे, दादरी कांड व मथुरा में हुई हिंसा ने यूपी के इस हिस्से में सपा को बेहद कमज़ोर कर दिया है। जाटों ने भी अजीत सिंह का साथ छोड़कर बीजेपी को अपना हितैषी मान लिया है।

अगर लोकसभा की तरह राज्य चुनाव में भी बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोगों का समर्थन मिला तो पार्टी आने वाले चुनाव में बेहद अच्छा प्रदर्शन करेगी। प्रयाग नगरी इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय इकाई की बैठक करके हिन्दुओं को पूरी तरह से अपनी तरफ खींचने की योजना बनाई जा रही है। केशव प्रसाद मौर्या को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 31 प्रतिशत ओबीसी जनसंख्या को भी टारगेट किया जा रहा है। यूपी में राजनाथ सिंह को पार्टी प्रदेश के सबसे बड़े नेता के रूप में दिखा रही है, हालांकि उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं घोषित किया गया है। उनके ज़रिए पार्टी 8 प्रतिशत ठाकुर वोट जीतना चाहेगी। ब्राह्मण, कुर्मी व भूमिहार वोट जिनकी संख्या क़रीब तेरह प्रतिशत है भी बीजेपी को अच्छा समर्थन देंगे, क्‍योंकि यह यूपी में परंपरागत इन्हीं के साथ जुड़े रहे हैं।  

यूपी में सबसे बड़ा संकट कांग्रेस के साथ है जो बीते विधानसभा चुनाव में मिली 29 सीटें ही बचा ले तो बड़ी बात होगी। यूपी में कांग्रेस को भी उच्च जातियों के वोट मिलते आए हैं, लेकिन पूरे देश में कांग्रेस की हो रही दुर्गति के चलते बेहद मुश्किल है कि पार्टी पर ज़्यादा लोग भरोसा कर पाएं। कांग्रेस के पास यूपी में कोई भी बड़ा नेता नहीं है जो मायावती व अखिलेश यादव से टक्कर ले सके। कांग्रेस में आपसी मतभेद भी बढ़ रहे हैं और पार्टी को प्रशांत किशोर के अलावा कोई सहारा नज़र नहीं आ रहा है, जिन्होंने बीते लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी व बिहार चुनाव में नीतीश के लिए रणनीति बनाई थीं। राहुल गांधी भी कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने में पूरी तरह नाकामयाब साबित हुए हैं।   

जातीय व धार्मिक समीकरण से देखें तो यूपी में बीएसपी और बीजेपी को फ़ायदा मिलता दिख रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय का विश्वास खो रही समाजवादी पार्टी को नुकसान। लोकसभा चुनाव के बाद से सिर्फ बुरे दिन देख रही कांग्रेस की ज़ोरदार वापसी यूपी चुनाव में तो खैर मानों नामुमकिन ही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरण

पश्चिम उत्तर प्रदेश की पहले चरण वाली 8 सीटों में से पांच- मेरठ, मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर और बिजनौर में करीब 33 से लेकर 42% तक मुस्लिम आबादी है. ऐसे में जातिगत समीकरण पर सवार सपा, रालोद और बसपा की काट के लिए भाजपा के पास विकास, राष्ट्रवाद और एचएम फैक्टर यानी हिंदू-मुस्लिम अहम हथियार साबित होता है.

सबसे प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबला मुजफ्फरनगर में है, जहां रालोद प्रमुख अजित सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. अजीत सिंह पिछली बार बागपत से उतरे थे और तीसरे नंबर पर रहे थे. वे गठबंधन के उम्मीदवार हैं. इस सीट पर करीब 38% मुसलमान और करीब 14% दलित वोटर हैं. इसके साथ ही दो लाख जाट मतदाता हैं. जिसके सहारे अजित सिंह यहां मजबूत हैं.

लेकिन यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान की ताकत क्षेत्र में उनकी सक्रियता है. महावीर चौक स्थित सपा के कार्यालय में बैठे रालोद के जिला अध्यक्ष अजीत राठी कहते हैं कि मुजफ्फरनगर दंगों में जाट और मुस्लिम एकता को तोड़ने काम भाजपा ने किया था. लेकिन भाईचारा सम्मेलन कर चौधरी साहब (अजित सिंह) ने इस खाई को पाट दिया है.

मेरठ की बात करें तो सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मेजर हिमांशु कहते हैं कि गठबंधन के बसपा उम्मीदवार हाजी याकूब की सभी वर्गों में सहज स्वीकार्यता नहीं है. भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल तीसरी बार चुनाव में हैं, क्षेत्र में उनकी सक्रियता कम रही, बावजदू इसके याकूब की कट्‌टर छवि ही राजेंद्र अग्रवाल की सबसे बड़ी ताकत बन गई है.

याकूब वही हैं जिन्होंने मोहम्मद साहब का कार्टून बनाने वाली पत्रिका के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने पर 51 करोड़ का इनाम देने की घोषणा की थी. गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में केंद्रीय मंत्री और भाजपा उम्मीदवार डाॅ. महेश शर्मा ने मंत्री रहते कई विकास कार्य करवाए हैं, जिनमें जेवर हवाई अड्‌डा भी शामिल है.

लेकिन 3 लाख गुर्जर, 1.5 लाख यादव और दो लाख मुसलमान वोटों वाली इस सीट पर बसपा के सत्यवीर नागर अपनी बढ़त मान रहे हैं. वहीं कांग्रेस ने अरविंद सिंह को उतारा है, वे राजपूत वोट काट सकते हैं, जो कि भाजपा का वोट है.

गाजियाबाद में जनरल वीके सिंह सुरक्षित नजर आ रहे हैं. करीब दो लाख राजपूत वोट और मिडिल क्लास वोटर्स की बड़ी संख्या जनरल के पक्ष में दिखती है. यह पश्चिमी यूपी की सबसे बड़ी सीट है, जहां करीब 27 लाख मतदाता हैं.

वी.के. सिंह के पक्ष में एक बात और जाती है कि स्थानीय राजनीति में हस्तक्षेप से उन्होंने खुद को दूर रखा. इस कारण सभी भाजपाई प्रचार में लगे हैं. बसपा ने सुरेश बंसल को टिकट दिया है. यहां करीब दो लाख वैश्य वोट हैं, पर बंसल की चुनौती यही होगी कि वे भाजपा के परंपरागत वैश्य वोट को कितना खींच पाएंगे.

बागपत में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तीसरी पीढ़ी के जयंत चौधरी मैदान में हैं. जयंत 2009 में मथुरा से सांसद रहे हैं, पर पिछला चुनाव वहीं से हारे थे. जयंत रालोद के टिकट पर गठबंधन के उम्मीदवार हैं.  ऐसे में यहां केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह का सीधा मुकाबला जयंत से है. जातीय गणित के कारण सत्यपाल के लिए यह चुनाव मुश्किल हो सकता है.

सहारनपुर में गठबंधन उम्मीदवार बसपा के फजलुर्रहमान ने कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. 2014 की प्रचंड मोदी लहर में भी इमरान 64 हजार वोटों से हारे थे, जो इस क्षेत्र की सबसे छोटी हार थी. लेकिन इस बार बसपा प्रत्याशी के कारण वे परेशानी में है.

39% मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही इमरान की हार-जीत तय करेगा. उनका मुकाबला भाजपा के सौम्यछवि के नेता और वर्तमान सांसद राघव लखन पाल से है. इमरान को भीम आर्मी के चंद्रशेखर का भी समर्थन हासिल है. ऐसे में इमरान को दलित वोट की भी आस है.

बिजनौर में राजपूत अपेक्षाकृत अधिक हैं, जाट वोट भी हैं जिन पर चौधरी अजीत सिंह का असर दिखता है. यहां कभी बसपा में रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस बार कांग्रेस टिकट पर मुकाबले को रोचक बना दिया है. भाजपा ने वर्तमान सांसद भारतेंद्र सिंह और बसपा ने मलूक नागर को फिर से मैदान में उतारा है.

कैराना में गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन सपा से लड़ रही हैं. उपचुनाव में वे रालोद से जीती थीं. भाजपा ने दिग्गज गुर्जर नेता स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को नजरअंदाज कर सहारनपुर जिले के विधायक प्रदीप चौधरी को टिकट दिया है. जिन्हें अपेक्षाकृत कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा है. कांग्रेस के हरेंद्र मलिक के कारण भाजपा को जाट वोट कटने का खतरा बढ़ गया है.

मेरठ के सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह कहते हैं कि केंद्र जीएसटी, नोटबंदी, रोजगार, मेक इन इंडिया की चर्चा तक नहीं कर रहा है. यहां प्रचार में बात हो रही है हिंदू-मुसलमान, पाकिस्तान, एयरस्ट्राइक की. विकास की बात करें तो एयरपोर्ट और दिल्ली-डासना-मेरठ हाईवे अधूरा ही पड़ा है.

2014 की स्थिति:

सभी 8 सीटों-सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और बिजनौर में भाजपा जीती थी.

सबसे बड़ा फैक्टर क्या रहेगा?

मुद्दे: सांप्रदायिकता, गन्ने का भुगतान, बेरोजगारी

चीनी मिलों द्वारा गन्ने का भुगतान देरी से दिए जाने से क्षेत्र के 5 लाख से अधिक किसान परेशान हैं. कानून व्यवस्था, सांप्रदायिक तनाव और बेरोजगारी भी असरदार है.  मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग, गाजियाबाद-गौतमबुद्ध नगर, नोएडा में बड़े आवासीय प्रोजेक्ट में फंसे लोग मुद्दा है.

जाति: मुस्लिम, जाट, दलित और गुर्जर असरदार रहेंगे

बिजनौर, सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ में मुसलमानों की संख्या 32.6 से लेकर 41.7% है. गाजियाबाद, नोएडा, बागपत में भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या डेढ़ लाख से पांच लाख तक है. जाट, गुर्जर, दलित वोट भी अच्छी खासी तादाद में हैं. त्यागी, सैनी, राजपूत वोट भी बड़ी संख्या में हैं इन्हें भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता है.

गठबंधन: चौधरियों के लिए कांग्रेस ने छोड़ी दो सीटें

सपा बसपा राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन है. रालोद मुजफ्फरनगर, बागपत तो सपा गाजियाबाद, कैराना वहीं बसपा सहारनपुर, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर और बिजनौर में लड़ रही है. भाजपा अकेले चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस ने चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है.

Wednesday, April 1, 2020

कोरोना पर कुछ सवाल और उनके जवाब


ये सवाल आज के समय में हर किसी के दिल में चल रहे है इससे डरिए नहीं आइए इसे समझिए

कोरोना का कहर तो दुनिया में चोरों तरफ हैं। इससे दुनिया का कोई देश अछुता नहीं रहा है। तो कोरोना को लेकर जनता में मन में कई ऐसे सवाल है जो एक से है। तो आज हम बात करने जा रहे है कुछ ऐसे ही सवालों के जवाबों की-
1. क्या है कोरोना वायरस ?
कोरोना वायरस एक वायरसों का एक पूरा परिवार है जो इंसानों और जानवरों में गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है। बता दें कि इंसानों में यह वायरस सांस लेने में परेशानी जैसी संबंधित तमाम संक्रमण पैदा कर देता है। जिससे मिडिल ईस्ट रेस्पेरटरी सिंड्रोम (MERS) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम (SARS) जैसी खतरनाक बीमारियां हो जाती हैं। 
2. कैसे फैलता है कोरोना वायरस (किन-किन कारणों से)
यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यदि कोई व्यक्ति वायरस से संक्रमित है और कोई अन्य स्वस्थ व्यक्ति इसकी चपेट में आता है तो वो व्यक्ति भी इसका शिकर हो जाता है। जब कोरोना से पीड़ित शख्स खांसता है या सांस लेता है तो नाक या मुंह से कुछ छींटे दूसरे इंसान के शरीर में भी प्रवेश कर जाते है और वो स्वस्थ व्यक्ति संक्रमण का शिकार हो जाता है। इसके अलावा कोई भी वस्तु या सतह को छूकर हाथों को अपने मुंह, नाक या आंखों के पास ले जाने से भी आप कोरोना वायरस का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों से करीब 3 फीट या 1 मीटर की दूरी बनाए रखना जरूरी है। 

3. क्या कोरोना हवा के जरिए फैलता है ?
कई लोग ये सवाल भी करते है कि क्या कोरोना वायरस हवा के जरिए भी फैलता है तो आपको बता दें कि अभी तक हुई स्टडीज से ऐसा कुछ पता नहीं चला है। कोविड-19 मुख्यत: सांस या छींकने वक्त निकले छींटों के संपर्क में आने से फैलता है ना कि हवा से।

4. पीड़ित व्यक्ति के मल से भी हो सकता है संक्रमण ?
कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति के मल-मूत्र से उस स्वस्थ व्यक्ति के संक्रमित होने का खतरा काफी कम है। इस बात को लेकर कुछ स्टड़ी में बताया गया है कि कुछ मामलों में पीड़ित व्यक्ति के मल में कोरोना वायरस मौजूद होता है। लेकिन इसे महामारी की वजह नहीं कह सकते है। बाथरूम के इस्तेमाल के बाद या खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धो के इस सक्रमण से बचा जा सकता है। 

5. कोरोना से बचने के लिए मास्क कितना फायदेमंद ?
इस बात को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन  WHO के मुताबिक, अगर किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण नजर आते है या आप बीमार हैं तो ही मास्क पहनें। इसके अलावा अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति का ध्यान रख रहे है देखभाल कर रहे हैं जो कोरोना वायरस से संक्रमित है तो भी आप मास्क पहनिए। लेकिन अगर आप बीमार नहीं है या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में नहीं है तो आपको मास्क पहनने की जरूरत नहीं है।

6. किन लोगों को होता है कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा ?
इस बात को लेकर अभी तक जितनी स्टडी हुई है उसमें पता चला है कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा अपना शिकार बुजुर्गों और पहले से बीमार (हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज, लंग डिसीज, कैंसर या डायबिटीज) आदि बीमारी वाले लोगों को अपना ज्यादा शिकार बनता हैं। 

7. क्या पालतू जानवर से भी फैलता है कोरोना वायरस ?
बता दें कि अभी अभी तक हॉन्ग कॉन्ग में एक कुत्ते के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का मामला सामने आया है लेकिन अभी इसका कोई सबूत नहीं है कि किसी कुत्ते, बिल्ली या पेट से कोरोना का संक्रमण फैल सकता है।

8. क्या नॉनवेज खाने से फैल सकते है कोरोना वायरस ?
कोरोना वायरस ह्यूमन वायरस है। यह एक से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता हैं। दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि नॉनवेज और अंडा खाने से ये वायरस नहीं फैलता। साथ ही नॉनवेज और कोरोना वायरस का कोई लेना-देना नहीं है। अगर आपको नॉनवेज खाना है तो उस अच्छे से पकाकर खा सकते हैं. खान-पान में भी हाइजीन का ध्यान रखने की जरूरत है।

कोरोना दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट- UN प्रमुख


कोरोना महामारी को लेकर संयुक्त राष्ट्रीय सचिव एंटोनियो गुटेरस ने दुनिया को चेताया। उन्होंने इसे द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट बताया है।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने कोरोना को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताया है। 

गुटेरस ने कहा, "संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि ये बीमारी दुनिया में हर किसी के लिए खतरा है और.. इसका अर्थव्यवस्था पर ऐसा असर होगा कि पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी मंदी सामने आएगी. दुनिया में अस्थिरता, अशांति और टकराव बढ़ेंगे. इन सबको देखकर हमें यकीन हो जाता है कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे चुनौतीपूर्ण संकट है"।

कोरोना से निपटने के लिए बंद करना होगा राजनीतिक खेल

1945 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के खत्म होने होने के बाद राष्ट्र की स्थापना हुई थी इसके 193 सदस्य देश हैं। गुटेरस ने कहा, "इस संकट का मजबूत और असरदार हल तभी संभव है जब हर कोई साथ आए. इसके लिए हमें राजनीतिक खेल बंद करने होंगे और समझना होगा कि मानव प्रजाति दांव पर लगी हुई है"।

गुटेरस ने कहा कोरोना महामारी ने दुनिया भर में कई लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। इससे भयंकर आर्थिक तबाही हो रही है। उद्योग धंधे खत्म हो रहे हैं हो रहे हैं। इस स्थिति को देखकर गुटेरस ने कहा की कई विकासशील देशों की बीमारी से लड़ाई में मदद के लिए हम अभी तक एक वैश्विक पैकेज का ऐलान नहीं कर सके हैं।

यूएन प्रमुख ने कहा, "हम धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं लेकिन हमें अपनी रफ्तार तेज करनी होगी और अगर हम वायरस को हराना चाहते हैं तो हमें और भी बहुत कुछ करना होगा"।

बता दें, मंगलवार को यूएन ने विकासशील देशों की मदद के लिए एक नए फंड की घोषणा की। पिछले हफ़्ते उन्होंने वैश्विक समुदाय से गरीबों और संघर्ष से प्रभावित देशों के लिए दान की अपील की थी। गुटेरस ने कहा, "अमीर देशों से पारंपरिक मदद के अलावा हमें अतिरिक्त आर्थिक मदद की भी जरूरत है ताकि विकासशील देश इस संकट का सामना कर सकें"।
 
वापस लौट सकत है कोरोना वायरस

गुटेरस ने कहा, "कोरोना वायरस गरीब देशों खासकर अफ्रीका से अमीर देशों में वापस लौट सकती है और लाखों लोगों की जानें जा सकती हैं।

वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कोरोना वायरस को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा इस महामारी से एशिया में गरीबी बढ़ सकती है। इससे गरीब और गरीब होंगे। यहां तक कि अमीर देशों को भी कई संकटों का सामना करना होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समा मारी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था रुक जाएगी।

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "अगर महामारी बहुत ही भयावह स्थिति में पहुंच गई तो इस साल चीन की आर्थिक वृद्धि दर 0.1% पर पहुंच सकती है. चीन की तरह आसपास के देशों की अर्थव्यवस्था की हालत खराब होगी. इससे पूरे इलाके में गरीबी बढ़ेगी और लोगों के पास कमाई के साधन न के बराबर बचेंगे. वर्ल्ड बैंक ने ये भी कहा है कि कोरोना वायरस की महामारी से अर्थव्यवस्था को जो नुकसान होगा. 

Tuesday, March 31, 2020

गले में खराश कोरोना के लक्षण तो नहीं, जानिए

क्या गले में खराश कोरोना वायरस का लक्षण है?
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सामान्य वायरल से मिलते जुलते लक्षणों के कारण कोरोना को पहचानने में काफी परेशानी हो रही है ऐसे में जानें, क्या गले में खराश कोरोना का लक्षण है?

 पूरी दुनिया में अपना कहर बरसा रहे कोरोना के भारत में मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस बीच लोगों को घर में रहने के लिए कहा गया है। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कोरोना से जुड़ी कुछ ऐसी खास खास जानकारी जिससे आप इसे आसानी से पहचान सकते हैं साथ ही अपनी सुरक्षा भी कर सकते हैं।

क्या हैं कोरोना वायरस के लक्षण?

कोरोना वायरस के लक्षण आम सर्दी-जुकाम की तरह ही होते हैं जैसे- गले में खराश होना, सूखी खांसी और बुखार आना। वायरल से मिलते-जुलते लक्षणों की वजह से लोगों को कोरोना और आम सर्दी-जुकाम में फर्क करना मुश्किल हो रही है। 
WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुखार, सूखी खांसी, सांस की तकलीफ, थकान, थूक बनना, गले में खराश, सिरदर्द, लकवा या गठिया, ठंड लगना, बंद नाक, दस्त, मिचली या उल्टी, खांसी में खून आना कोरोना वायरस के अन्य लक्षण हैं।

डॉक्टर्स क्या कहते हैं ?

दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर अनिल कुमार राय की माने तो, 'थकान, सांस लेने में तकलीफ, छाती में बलगम, जकड़न या भारीपन के साथ खांसी आ रही है तो ये कोरोना वायरस के लक्षण हैं"। हालांकि सामान्य वायरस और सर्दी में भी इसी तरह के लक्षण होते हैं और यही लक्षण H1N1वायरस (स्वाइन फ्लू) के भी थे।

क्या गले में खराश कोरोना वायरस का लक्षण है?

गले में खराश कोरोना का एक लक्षण हो सकता है। इस वायरस के लक्षण 2 से 10 दिनों के बीच दिखने शुरू शुरू होते हैं। लक्षण देरी से देखने की वजह से लोग बाहर से बीमार नहीं लगते लेकिन यह संक्रमण लोगों में आसानी से फैल रहा है।

आपको बता दें, WHO इस बीमारी को महामारी घोषित कर चुका है। भारत के खिलाफ लोगों को सचेत करने के लिए WHO की तरफ से कई तरह की पहल की जा रही है। जिससे की लोग इस वायरस के चपेट में आने से बचें।

तबलीगी मरकज में कोरोना वायरस के 24 मामले

कोरोना वायरस: तब्लीगी मरकज में कोरोना वायरस के 24 पॉजिटिव मामले

दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज़ में शामिल 24 जमातें अब तक कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। 

 आंध्र प्रदेश में, पिछले 12 घंटों के भीतर कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि हुई है। सोमवार रात 9 बजे के बाद से अब तक 33 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 24 दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इसके अलावा, 5 लोगों के संपर्क में आने से भी संक्रमित लोग पाए गए है। आंध्र प्रदेश में कोरोना रोगियों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। 

Delhi (दिल्ली) के निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज़ में शामिल 24 जमातें अब तक कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। जबकि 700 लोगों को क्वारनटीन सेंटर भेजा गया है। अब तक जमात में शामिल 9 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में तेलंगाना से लेकर कश्मीर तक के लोग थे। दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मरकज में कोरोना का एक मामला तब सामने आया जब दिल्ली में एक 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। वह कोरोना संक्रमित पाया गया था।

19 प्रदेशों के लोग जमात के मरकज में शामिल होने आए थे। जिनमें से 1830 लोग शामिल हुए थे।  अंडमान से 21, असम से 216, बिहार से 86, हरियाणा से 22, हिमाचल से 15, हैदराबाद से 55, कर्नाटक से 45, महाराष्ट्र के 115, मेघालय में 5 और केरल से 15 लोग आए थे। इसके अलावा मध्य प्रदेश से 107, ओडिशा से 15, पंजाब से 9, राजस्थान से 19, झारखंड से 46, तमिलनाडु से 501, उत्तराखंड से 34, उत्तर प्रदेश से 156 और पश्चिम बंगाल से 73 लोग आए थे। अब सरकार हर उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जो मरकज में शामिल हुआ या उन लोगों के संपर्क में आया। दिल्ली सरकार के अनुसार, मरकज में लगभग 1830 जमात शामिल थे, जिनमें से 700 को छोड़ दिया गया है, जबकि 334 को दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर ने कोरोना जांच की किट बनाने का दावा किया


BHU के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलिक्युलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्‍स की शोध छात्राओं और एसोसिएट प्रोफेसरों ने ऐसी नई तकनीक बनाने का दावा किया है जो 4 से 6 घंटे में कोरोना की जांच करेगी।
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महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना वायरस को रोकने के अब तक कोई इलाज नहीं बना है इसके साथ ही दूसरी बड़ी समस्या ये है कि भारत में इसकी जांच रिपोर्ट आने में भी एक से अधिक दिन का समय लग रहा है। जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ रही है। 

इस बीच BHU ( काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलिक्युलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्‍स की शोध छात्राओं और एसोसिएट प्रोफेसरों ने मिलकर एक ऐसी नई तकनीक बनाने का दावा किया है जो सस्ती और सटीक होने के साथ ही 4-6 घंटों में ही कोरोना के जांच का परिणाम देगी।

एक महीने की मेहनत के बाद की बनाई तकनीक

विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीता राय और उनकी टीम में शामिल शोध छात्रा डॉली दास, हीरल ठक्कर और खुशबू प्रिया ने करीब एक महीने की मेहनत के बाद इस नई तकनीक की खोज का दावा किया है।

इस बारे में और सूचना देते हुए एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीता राय ने बताया, "उनकी तकनीक आरटी-पीसीआर पर काम करती है और इस सिद्धांत पर अभी देश में कोई और तकनीक कोविड-19 के परीक्षण के लिए नहीं है. यह एक ऐसे अनोखे प्रोटीन सिक्वेंस को टारगेट करता है, जो सिर्फ कोविड-19 में मौजूद है और किसी और वायरल स्ट्रेन में मौजूद नहीं है. इस टेक्नोलॉजी की नवीनता के आधार पर एक पेटेंट भी फाइल किया गया है"।

RT-PCR आधारित कोई किट नहीं है

हालांकि प्रोफेसर डॉ. गीता राय द्वारा दावे क जब 
भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा निरीक्षण किया गया तो उसमें यह पाया गया कि 'देश में इस सिद्धांत पर RT-PCR आधारित कोई किट नहीं है, जो कि इस तरह के प्रोटीन सिक्वेंस को टारगेट कर रहा हो'। जबकि डॉक्टर गीता राय ने दावा किया, "देश में कोविड-19 के संक्रमण की बढ़ती स्थिति के लिए सटीक, विशिष्ट, तीव्र और सस्ते किट की कमी को ये परीक्षण सभी मापदंडों को पूरा कर सकता है"।

CDSCO और ICMR से किया संपर्क

इस मामले में आगे और सहयोग के लिए उन्होंने CDSCO यानी सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन और ICMR यानी इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च से संपर्क किया है, लेकिन अब तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है।

Sunday, March 29, 2020

पीएम मोदी बोले- आप सभी को जो कठिनाई हुई है उसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं



कोरोना वायरस को लेकर पूरा देश लॉकडाउन की स्थिति में हैं। वहीं आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर जनता को संबोधित किया हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से असुविधा, कठिनाई के लिए माफी मांगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं आपकी दिक्कतें समझता हूं, लेकिन भारत को, कोरोना के खिलाफ जीतने के लिए, ये कदम उठाए बिना कोई रास्ता नहीं था। पीएम मोदी ने इसके साथ ये भी कहा कि अभी भी कुछ लोग अब भी कानून तोड़ रहे हैं क्योंकि अभी भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे है। तो आइए आपको देते है पीएम मोदी की मन की बात के पल-पल अपडेट- 
मन की बात में बोले पीएम ने कहा नर्सिंग समुदाय के लिए बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी है।
भारत से कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के पीएम ने देशभर में लॉकडाउन लागू कर दिया है। लॉकडाउन लागू होने के बाद आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार के दिन सुबह 11 बजे अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देशवासियों को संबोधित किया हैं। इस बार पीएम ने मन की बात कार्यक्रम के लिए कोरोना वायरस के बात उठाई हैं। कोविड-19 के कारण देश में उपजी परिस्थितियों को लेकर अपनी बात रखी हैं। 
11:08 AM
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'आमतौर पर मैं मन की बात में कई विषयों को ले करके आता हूं। लेकिन आज देश के मन में सिर्फ एक ही बात है- ‘कोरोना वैश्विक महामारी’ से आया हुआ भयंकर संकट, ऐसे में मैं कुछ और कहूं वो उचित नहीं होगा। हो सकता है, बहुत से लोग मुझसे नाराज होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है। मैं आपकी दिक्कतें समझता हूं, लेकिन भारत को, कोरोना के खिलाफ जीतने के लिए, ये कदम उठाए बिना कोई रास्ता नहीं था। मैं फिर एक बार, आपको जो भी असुविधा हुई है, कठिनाई हुई है, इसके लिए क्षमा मांगता हूं।' कोरोना वायरस ने दुनिया को एक-साथ कैद कर दिया है। ये ना कोई राष्ट्र की सीमाओं में बंधा है, न ही कोई क्षेत्र देखता है और न ही कोई मौसम इसलिए लोगों को, इसे वायरस के कहर को खत्म करने के लिए एकजुट होकर संकल्प लेना होगा ताकि हम इस पर विजय पा सकें। बता दें कि अमेरिका में पिछले 24 घंटों के दौरान कोविड-19(कोरोना) वायरस के कारण सर्वाधिक 453 मौतें हो चुकी हैं। पीएम मोदी मे कहा कि, “मैं जानता हूं कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता, लेकिन कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं क्योंकि अभी भी वो स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे। अगर आप 21 दिनों के लॉकडाउन का नियम तोड़ेंगे तो वायरस से बचना मुश्किल होगा।”
11:10 AM
अपनी बात को आगे बढ़ते हुए पीएम ने कहा कि, दुनिया भर में बहुत से लोगों को कुछ इसी तरह की खुशफहमी थी। आज ये सब पछता रहे हैं। बीते दिनों में मैंने ऐसे कुछ लोगों से फोन पर बात की है, उनका उत्साह भी बढ़ाया है और उनसे बातें करके मेरा भी उत्साह बढ़ा है।
11:19 AM
साथ ही इस लड़ाई के योद्धा ऐसे हैं जो घरों में नहीं, बल्कि बाहर रहकर वायरस का मुकाबला कर रहे हैं, फ्रंट लाइन सोल्जर, नर्सेज, डॉक्टर, पैरा-मेडिकल स्टाफ, ऐसे साथी, जो कोरोना को पराजित कर चुके हैं, उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। साथियो जैसा कि राम ने बताया कि उन्होंने हर उस निर्देश का पालन किया जो इनको कोरोना की आशंका होने के बाद डॉक्टरों ने दिए, इसी का परिणाम है कि आज वो स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। दुनिया का अनुभव बताता है कि इस बीमारी से संक्रमित व्यक्तियों कि संख्या अचानक बढती है। अचानक होने वाली इस वृद्धि की वजह से विदेशों में हमने अच्छे से अच्छे स्वास्थ्य सेवा को जवाब देते हुए देखा है। साथियों, हम मेडिकल स्तर पर इस महामारी से कैसे निपट रहे हैं इसके अनुभव जानने के लिए मैंने कुछ डाक्टरों से बात की जो इस लड़ाई में पहली पंक्ति में मोर्चा संभाले हुए हैं। रोजमर्रा की उनकी गतिविधि इन्हीं मरीजों के साथ पड़ती है।
11:26 AM
पीएम मोदी ने अपनी बात को आगे  बढ़ाते कहा कि, भारत में ऐसी स्थिति न आये इसके लिए ही हमें निरंतर प्रयास करना है। आज जब मै डाक्टरों का त्याग, तपस्या, समर्पण देख रहा हूं तो मुझे आचार्य चरक की कही हुई बात याद आती है। आचार्य चरक ने डाक्टरों के लिए बहुत सटीक बात कही है। ये संयोग है कि वर्ष 2020 को अंतरराष्ट्रीय विश्व नर्स वर्ष और मिडवाइफ के तौर पर मना रहा है। इसका सबंध 200 वर्ष पूर्व 1820 में जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगल से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने नर्सिंग को एक नई पहचान दी। दुनिया की हर नर्स के सेवा भाव को समर्पित ये वर्ष निश्चित तौर पर नर्सिंग समुदाय के लिए बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी बन कर आया है। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस इम्तिहान में ना सिर्फ सफल होंगी बल्कि अनेकों जीवन भी बचाएंगी। आप जैसे तमाम साथियों के हौसले और जज़्बे के कारण ही इतनी बड़ी लड़ाई हम लड़ पा रहे हैं। इस जंग में हमारे आसपास ऐसे अनेक लोग हैं जो समाज के रीयल हीरो हैं और इस परिस्थिति में भी सबसे आगे खड़े हैं। मुझे नरेंद्र मोदी एप पर बंगलूरू  के निरंजन सुधाकर हेब्बाले जी ने लिखा है कि ऐसे लोग डेली लाइफ हीरोज हैं।
11:32 AM
आपने देखा होगा, बैंकिंग सेवाओं को सरकार ने चालू रखा है और बैंकिंग-क्षेत्र के लोग पूरे मन से इस लड़ाई का नेतृत्व करते हुए आपकी सेवा में मौजूद हैं। आज के समय, ये सेवा छोटी नहीं है। कई लोगों ने वायरस के कोई लक्षण नहीं होने पर भी खुद को क्वारांटाइन (एकांतवास) किया। ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे विदेश से लौट करके आए हैं, इसलिए जब लोग खुद इतनी जिम्मेदारी दिखा रहे हैं तो उनके साथ खराब व्यवहार करना जायज नहीं है। कोरोना वायरस से लड़ने का कारगर तरीका सामाजिक दूरी है। हमें समझना होगा कि सामाजिक दूरी का मतलब सामाजिक संपर्क खत्म करना नहीं बल्कि ये समय सामाजिक दूरी को बढ़ाने और भावनात्मक दूरी घटाने का है। सोशल मीडिया में ही मैंने देखा, कि कुछ लोगो ने, वर्षों से घर में पड़े तबला, वीणा, जैसे संगीत के वाद्ययंत्रों को निकालकर रियाज करना शुरू कर दिया है। आप भी ऐसा कर सकते हैं। 
11:37 AM
कोरोना वायरस के खिलाफ ये युद्ध अभूतपूर्व और चुनौतीपूर्ण है। इस दौरान लिए जा रहे फैसले ऐसे है, जो दुनिया के इतिहास में कभी देखने और सुनने को नहीं मिले। इसे रोकने के लिए जो प्रयास हो रहे हैं वही भारत को इस महामारी पर जीत दिलाएंगे।  ‘मन की बात’ के लिए, फिर, अगले महीने मिलेगें और तब तक इस संकटों को मात करने में हम सफल हो भी जाएं, इसी एक कल्पना के साथ, इसी एक शुभकामना के साथ, आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।

Monday, March 23, 2020

पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने की कोरोना वायरस पर अपील

कोरोना वायरस को लेकर शोएब अख्तर ने लोगों से की अपील, कहा- धर्म से उपर उठकर सोचो
जब पूरी दुनिया जानलेवा कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। इस दौरान पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज और रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर ने लोगों को एक संदेश दिया है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हमें हिंदू-मुस्लिम को ना देखते हुए एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। शोएब ने एक वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की है। जिसमें उन्होंने पूरी दुनिया को एकजुट होकर काम करने की अपील की है।
शोएब अख्तर ने अपने यू-ट्यूब चैनल के जरिए कहा कि हमें सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वक्त है जब हमें हिंदू-मुस्लिम, अमीर-गरीब से उपर उठकर सोचना होगा। अख्तर ने कहा, पूरी दुनिया के लोगों से मैं आग्रह करना चाहता हूं कि कोरोना वायरस ग्लोबल क्राइसिस है और सभी को इसके बार में ग्लोबल फोर्स की तरह सोचना होगा। अमीर लोग फिर भी बच जाएंगे लेकिन गरीब कैसे बचेगा। हमें सामान खरीदने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। हमें उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए जो रोज कमाकर खाते हैं। दुकाने खाली हो रही हैं, इसकी क्या गारंटी है कि आप तीन महीने तक जिंदा रहेंगे।
बता दें, पाकिस्तान में कोरोना वायरस ने 799 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है और 6 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3,39,025 हो गई है। वहीं इस जानलेवा वायरस ने 15 हजार से ज्यादा लोगों की ले ली है।

Saturday, March 21, 2020

कोरोना पॉजिटिव महिला को ₹2600000 का बिल भेजा


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दुनियाभर में महामारी की तरह फैल चुके कोरोना के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे पढ़कर आप चौक जाएंगे। 
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कोरोना वायरस के कहर के कारण शक्तिशाली देश डरे हुए हैं। लोग इस महामारी से बचने के लिए तरह-तरह के नुसके आजमा रहे हैं। इस बीच एक हैरान करने वाला एक मामला सामने आया है। बता दें, कोरोना वायरस संक्रमण की जांच और ट्रीटमेंट के लिए हॉस्पिटल की ओर से एक महिला को 26 लाख 41 हजार रुपये का बिल भेजा गया है। 

time.com की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में डैनी एस्किनी नाम की महिला की छाती में दर्द शुरू हुआ था जिसके बाद वो हॉस्पिटल पहुंची। एस्किनी को छाती में दर्द के साथ ही सांस लेने में परेशानी और माइग्रेन की भी समस्या हो रही थी। वहीं महिला को देखकर उनके डॉक्टर को लगा कि महिला को नई दवा की वजह से रिएक्शन हो रहा है। जिसके बाद अमेरिका के बॉस्टन की रहने वाली महिला को एक हॉस्पिटल के इमरजेंसी में भेजा गया।

शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने पाया कि महिला एस्किनी को निमोनिया है जिसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद महिला का टेंपरेचर बढ़ने लगा और कफ भी शुरू हो गया। वहीं जब दो बार और हॉस्पिटल जाने के बाद बीमारी के सातवें दिन एस्किनी का महामारी कोरोना वायरस का टेस्ट किया गया और उन्हें फिर स्वस्थ होने के लिए घर जाने दिया।

टेस्ट के तीन दिन बाद महिला के वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। जिसके कुछ दिनों बाद ही महिला को हॉस्पिटल की ओर से जांच और ट्रीटमेंट के लिए 26 लाख से ज्यादा का बिल भेजा गया। एस्किनी ने कहा- "मैं बिल देखकर हैरान रह गई. मैं निजी तौर पर किसी को नहीं जानती जिनके पास इतने अधिक रुपये हों"।

आपको बता दें कि इस वक्त भारत में वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 285 हो गई है। 6700 से ज्यादा लोगों को निगरानी में रखा गया है। शनिवार की सुबह तक दुनिया में संक्रमित लोगों का आंकड़ा 2,76,000 से अधिक है, वहीं मृतकों की संख्या 11,400 से अधिक हो गई है।

कोरोना वायरस का प्रकोप: एक दिन में इटली में 627 मौतें


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दुनिया पर कहर ढ़ा रहे कोरोना वायरस के कारण इटली में एक दिन में रिकॉर्ड तोड़ मौतें दर्ज की गई। 
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कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण इटली में संक्रमित लोगों की संख्या रॉकेट की तेजी से बढ़ रही है। एक दिन पहले यानी शुक्रवार को इस वायरस के कहर से एक ही दिन में रिकॉर्ड 627 मौतें दर्ज की गई। इसके चलते देश में कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए गए। उधर, ब्रिटेन में भी एक ही दिन में 33 लोगों की मौत के बाद ‘लॉकडाउन’ घोषित कर दिया गया है। लोगों को घरों में बंद रहने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
बता दें, इटली में इस वायरस से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 4,032 हो गया है। जबकि संक्रमित लोगों की संख्या भी 41,035 से बढ़कर 47,021 पर पहुंच गई है। इस वायरस से सबसे अधिक प्रभावित लोम्बार्डी का उत्तरी क्षेत्र हुआ है। इस क्षेत्र में वायरस से 2,549 मौतें हुई हैं तो वहीं 22,264 लोग संक्रमित हुए हैं।
जॉगिंग-बाइक और साइकिल से घूमने पर प्रतिबंध
शुक्रवार को वायरस से हुईं 627 मौत के बाद इटली ने पार्कों में टहने और जॉगिंग या बाइक और साइकिल से घूमने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इटली में वायरस से जान गवाने वालों की औसत उम्र 79.5 है। इसके चलते बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी बरतने के लिए कहा है।
फ्रांस में 78 और लोगों की मौत
इस वायरस के चलते फ्रांस में 78 और लोगों की मौत हो गई है। जिसके बाद फ्रांस में मरने वालों की संख्या करीब 450 के पास पहुंच गई है। 
इटली में 13 डॉक्टरों की मौत
इटली में इस घातक संक्रमण ने 13 डॉक्टरों को अपना शिकार बना लिया है। डेली मेल की खबर की माने तो हाल ही में पांच डॉक्टरों ने एक ही दिन में जान गवां दी थी। इसके अलावा देश के 2,629 चिकित्सा कर्मी भी इस वायरस से पीड़ित हैं।

कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या ढाई सौ पर हुई


भारत में तेजी से बढ़ रहा कोरोना का कहर, संक्रमित लोगों का आकंड़ा बढ़कर 256 पहुंचा ! 
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बढ़ते समय के साथ कोरोना का कहर अपना विकराल रूप लेता जा रहा है। देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हालांकि सभी सरकारें लोगों को आम तौर पर सोशल डिस्टेंस मेंटेंन करने को कह रही है साथ ही कई एडवाइजरी भी सरकार की ओर जारी कर रही है। लेकिन बावजूद इसके सरकार की सभी कोशिशों पर पानी फेरते हुए कोरोना एक-एक कर लोगों को अपना शिकार बना रहा है। एक दिन पहले ही बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर द्वारा लापरवाही का मामला सामने आया है। जिसके बाद उनके खिलाफ लापरवाही के आरोप में लखनऊ के सरोजनी नगर थाने में शुक्रवार को मामला दर्ज कराया गया है। 
बता दें, इसी बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में वायरस (Coronavirus) संक्रमण के 50 नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद शुक्रवार शाम को संक्रमित लोगों का आकड़ा 250 तक पहुंच गया है। वहीं शनिवार सुबह तक ये आकड़ा बढ़कर 256 पर पहुंच गया है। जबकि संक्रमितों के पास (संपर्क) में आने वाले 6,700 से ज्यादा लोगों को कड़ी निगरानी में रखा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये जानकारी दी है, "देश में COVID-19 से संक्रमितों में 32 विदेशी हैं, जिनमें 17 इतालवी, तीन फिलीपीन के, दो ब्रिटेन और एक-एक कनाडा, इंडोनेशिया और सिंगापुर का निवासी है. इनमें अबतक दिल्ली, कर्नाटक, पंजाब और महाराष्ट्र में हुई चार मौतें भी शामिल है"।
पंजाब में सुनसान पड़ी है सड़कें
पंजाब के अमृतसर शहीद मदन लाल ढिंगरा अंतर्राज्यीय बस अड्डा सुनसान पड़ा हुआ है। कुछ एक बसे ही अड्डें में नजर आ रही हैं। लोग भी कम संख्या में नजर आ रहे हैं। जाहिर है पंजाब सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बस सेवाओं को स्थगित कर दिया गया हैं। इसलिए सड़के भी वीरान नजर आ रही है।
महाराष्ट्र गुरु तेग बहादुर रेलवे स्टेशन खाली
वायरस के बढ़ते कहर के कारण महाराष्ट्र गुरु तेग बहादुर रेलवे स्टेश पर इक्के-दुक्के लोग ही दिख रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा है कि सभी जरूरी सुविधाओं को छोड़कर, दूसरे ऑफिस और दुकानें बंद रहेंगी। 31 मार्च तक महाराष्ट्र के चार शहरों- मुंबई शहरी क्षेत्र, नागपुर और पिंपरी चिंचवाड़, पुणे में लॉक डाउन किया गया है। जिसके कारण ही लोकल ट्रेन के यात्री नजर नहीं आ रहे हैं।
लोकमान्य तिलक टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर भीड़
मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिल रही है। बता दें, कोरोना वायरस के कहर के कारण मुंबई शहर में काम कर रहे लोग अब अपने राज्य के लिए रवाना हो रहे हैं। स्टेशन पर मौजूद एक यात्री ने कहा, "मेरे पास कंफर्म टिकट थी इसके बावजूद मुझे अपनी सीट नहीं मिली. ट्रेन के अंदर काफी ज्यादा लोग हैं. मेरे घरवालों ने वापस आने को कहा है इसलिए वापस जा रहे हैं"।