Monday, September 26, 2016

जानिए कैसा रहा 67वां अणुव्रत अधिवेशन

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में 67वां अणुव्रत अधिवेशन असम की राजधानी गुवाहाटी में  दिनांक 21 से 23 अगस्त 2016 तक आयोजित हुआ। अणुव्रत आंदोलन की संवाहक चारों केन्द्रीय संस्थाओं अणुव्रत महासमिति, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास, अणुव्रत विश्व भारती और राष्ट्रीय अणुव्रत शिक्षक संसद संस्थान के 459 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिवेशन में सार्थक विमर्श, प्रस्तुतिकरण और समूहचर्चा में परम श्रद्धेय अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी का सभी सत्रों में पावन सान्निध्य एवं मार्ग दर्शन प्राप्त हुआ।

साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा जी, मुख्य मुनिश्री महावीर कुमार जी, मुख्य नियोजिका विश्रुतप्रभा जी, साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी का पावन मंगल आशीर्वाद एवं प्रेरणा पाथेय प्राप्त हुआ। अणुव्रत आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनिश्री जयकुमार जी, मुनिश्री कुमार श्रमण जी, मुनिश्री अशोक कुमार जी, मुनिश्री कीर्ति कुमार जी, मुनिश्री योगेश कुमार जी, मुनिश्री दिनेश कुमार जी आदि का मार्ग दर्शन एवं प्रेरणा प्राप्त हुई। अधिवेशन में अणुव्रत पुरस्कार से सम्मानित श्री हेमभाई, असम के पूर्व मुख्यमंत्री श्री प्रफुल मेहन्ता, स्थानीय विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य, बिलासीपाड़ा (असम) विधायक अशोक सिंघी, चेयरमेन फेडरेशन ऑफ स्किल डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के अनिल होमसमुंद्रकर ;एफएसडीओ), मसोटमी जिमिक डायरेक्टर ;एन.एस.डी.सी.), सुरेन्द्र तलपड़े आरएसएस अध्यक्ष (नॉर्थ ईस्ट), पंकज पाठक ;अध्यक्ष, किसान मोर्चा, बीजेपी, नार्थ ईस्ट), बीजेपी महिला नेता धीरा तालुकदर ;अध्यक्ष असम महिला मोर्चा, बीजेपी, नॉर्थ ईस्टद्धए दुलुमिनी ककोटी ;सचिव, असम महिला मोर्चा, बीजेपी, नॉर्थ ईस्टद्धए एन. नीलिम, छब्बीन राजख्वा ;पूर्व निदेशक कला एवं संस्कृति, असम), कृष्णानाथ (राज्य सचिव असम) प्रमुख थे। इस 67वें अधिवेशन की मेजबानी अणुव्रत समिति गुवाहटी ने की।
आपको बता दें कि अधिवेशन में कार्यों की समीक्षा के अलावा संगोष्ठियों, अणुव्रत पुरस्कार, अणुव्रत लेखक पुरस्कार, अणुव्रत सेवी सम्मान, श्रेष्ठ अणुव्रत समिति सम्मान आदि से सम्मानित किया गया।  इस परिपेक्ष्य में अणुव्रत महासमिति द्वारा प्रतिवर्ष स्वर्गीय सेठ हुकुम चंद सेठिया, श्री डूंगरगढ़, जलगांव (महाराष्ट्र) की स्मृति में दिया जाने वाला अणुव्रत लेखक पुरस्कार-2016 श्री दिलीप धींग, उदयपुर, चैन्नई को देने की घोषणा की गई। अणुव्रत सेवी सम्मान श्री लक्ष्मीलाल गांधी; भीलवाड़ा एवं श्री मदनलाल धोका, राजसमंद को प्रदान किया गया।

अणुव्रत सिलीगुड़ी को श्रेष्ठ समिति, अणुव्रत समिति दिल्ली को सक्रिय समिति (प्रथम), विशेष सक्रिय कार्यकर्ता, आंचलिक प्रभारी, पत्रिका अभिवृद्धि योजना, सिंहस्थ प्रकल्प-2016 सम्मान, क्षेत्रिय भाषा पत्रिका प्रकाशन ;कन्नड़ के लिये श्री शांति संकलेचा-बैंगलोर, अधिवेशन के संयोजक श्री सुबोध कोठारी एवं अणुव्रत समिति गुवाहटी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त अधिवेशन में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गये।
अधिवेशन में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन-एडवोकेट, महामं़त्री अरुण संचेती, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी सम्पतमल नाहाटा, अणुव्रत विश्व भारती के अध्यक्ष निर्मल एम. रांका, महामंत्री संचय जैन, राष्ट्रीय अणुव्रत शिक्षक संसद संस्थान के अध्यक्ष उत्तमचंद पगारिया, महामंत्री राजेश सुराणा, अणुव्रत प्रवक्ता व महासमिति संरक्षक डॉ. महेन्द्र कर्णावट, पूर्व अध्यक्ष, श्री बाबूलाल गोलछा, निर्वतमान अध्यक्ष श्री डालचंद कोठारी एवं चारों केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारीगण, कार्यसमिति के सदस्यगण तथा गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति गुवाहटी को उल्लेखनीय योगदान के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।  

इस अविस्मरणीय तीन दिवसीय 67वें अधिवेशन के कुछ महत्वपूर्ण पल, संगोष्ठियां, कार्यक्रम और अणुव्रत महासमिति की प्रबंध मंडल, कार्यकासमिति व वार्षिक साधारण सभा की बैठक का आंखो देखा लाइव विवरण हम आपके लिए लेकर आए हैं।

दिन शनिवार 20 अगस्त 2016
67वें अणुव्रत अधिवेशन से एक दिन पूर्व गुवाहाटी में स्थानीय मीडिया के साथ एक प्रेसवार्ता रखी गई। जिसमें अणुव्रत आंदोलन की चारों केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रेसवार्ता में अधिवेशन से संबधित पूरे कार्यक्रम और अणुव्रत आंदोलन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रेस कांफ्रेंस में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन-एडवोकेट ने मीडिया से बातचीत में बताया कि तीन दिवसीय अधिवेशन में विभिन्न विषयों पर 13 सत्रों का आयोजन किया जाएगा। यह अधिवेशन अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में संपन्न होगा। इस पूरे अधिवेशन में देशभर से लगभग 500 प्रतिनिधियों के अलावा असम की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से जानी मानी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस बार अणुव्रत अधिवेशन की थीम संयम है और संयम का अर्थ है व्यक्तित्व का विकास, जीवन का विकास।  आचार्यश्री महाश्रमण जी की अहिंसा यात्रा भूटान और नेपाल से होते हुए असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंची है। आपको बताना चाहूंगा यह यात्रा नवम्बर 2014 अपने देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले से शुरू हुई थी।

अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी सम्पतमल नाहाटा ने अणुव्रत आंदोलन की गति-प्रगति के बारे में पत्रकारों को बताया कि 1600 से ज्यादा स्कूलों में नैतिक निर्माण के लिए गीत गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा हैं। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 2 लाख बच्चे इस वर्ष इसमें भाग ले रहे हैं। पिछले वर्ष 1 लाख 78 हजार बच्चों ने भाग लिया था। आप सभी जानते हैं कि सरकार अपने नागरिकों पर नियम उपर से थोपती है लेकिन अणुव्रत मानस परिवर्तन पर ध्यान देता है। यह नैतिकता को बढ़ावा देता है, प्रोत्साहित करता है। यह धर्म सम्प्रदाय से बंधा हुआ नहीं है। कैसे मानस परिवर्तन हो, हम इस पर काम कर रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय अणुव्रत शिक्षक संसद संस्थान के अध्यक्ष उत्तमचंद पगारिया ने बताया कि हम बच्चों को अणुव्रत के नैतिक आचार-विचार से अवगत कराने का काम मुख्य रूप से कर रहे हैं। अणुव्रत विश्व भारती के महामंत्री संचय जैन ने मीडिया को जानकारी दी कि हम नैतिकता व संयम का संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। हमने गुवाहाटी में भी ‘बालोदय’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें बच्चों को नैतिकता से संबंधित मूल्यों के बारे में बताया जाता है।

प्रेस वार्ता में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन,एडवोकेट ने कहा कि तीन दिवसीय अधिवेशन के दौरान अणुव्रत की चारों केन्द्रीय संस्थाओं के कार्यों की समीक्षा की जाएगी। अतः आप से अनुरोध है कि आप यहां पर हमारी कार्यशैली को देखें और समझें।

प्रेसवार्ता में एक मीडियाकर्मी ने सवाल किया कि अणुव्रत अधिवेशन में बाहर से लोग आ रहे हैं। स्थानीय लोग दिखाई नहीं दे रहे हैं? इस सवाल के जवाब में एक स्थानीय अणुव्रती सदस्य ने असमिया भाषा में पत्रकारों के सभी सवालों के जवाब दिए और उन्हें संतुष्ट किया।
एक पत्रकार ने अणुव्रत के नशा मुक्ति अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि  यहां का युवा भटका हुआ है। यहां का युवा नशा, व्यसन व मांसाहार में फंसा हुआ है। नार्थ ईस्ट को तस्करी का बहुत बड़ा बाजार बना दिया गया है। आपके नशा मुक्ति अभियान से कुछ बदलाव की आशा की जा सकती हैं।

सवाल पत्रकार-आप नशा के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। आप ऐसा क्या कर रहे हैं जो ग्राउड लेवल पर दिखाई दे?
उत्तर- अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष ने कहा कि गुवाहाटी में हम नशे के खिलाफ संगोष्ठियों का आयोजन कर रहे हैं। छोटी-छोटी बस्तियों में लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है।

दिन रविवार 21 अगस्त 2016
रविवार को गुवाहाटी में सभी अणुव्रतियों के लिए सूर्योदय एक नई उर्जा के साथ हुआ। प्रातकाल 4;30 बजे से ही कार्यकर्ताओं में एक नई उर्जा, नई उमंग और नया जोश था। सभी प्रातः तड़के ही अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी के दर्शनों के लिए पहुंचे। गुरु दर्शन और आशीर्वाद के बाद योगा एवं प्रेक्षाध्यान से सभी ने अपने आपको नई ऊर्जा से भरा।
सुबह लगभग 8;30 बजे अधिवेशन परिसर के गेट नं 2 के प्रांगण में सैकड़ों पुरुष और महिलाएं एकत्रित हुए। भीड़ होने की वजह से जिसको जहां जगह मिली, वह वहां खड़ा हो गया। कुछ महिलाएं आचार्यश्री महाश्रमण जी के आवास स्थल के मुख्य द्वार के आस-पास ही बैठ गइंर्। ताकि वे वहां से सबकुछ आसानी से देख सके। सुबह साढ़े आठ बजे भी बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी लेकिन मजाल है किसी भी अणुव्रती का जोश ठंडा पड़ जाए। जी हां, ऐसा विहंगम दृश्य था 67वें अधिवेशन के शुभारंभ से पूर्व ध्वजारोहण के वक्त।

महिलाओं ने तो प्रांगड़ में पहुंचते ही माइक पर अणुव्रत के गीत गाने शुरू कर दिए। वहीं दूसरी ओर अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन और महामंत्री अरूण संचेती अपने सभी साथियों के साथ ध्वजारोहण के लिए मुख्य अतिथि असम के पूर्व सीएम प्रफुल मेहन्ता का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन उनके आने में विलंब हो रहा था। अणुव्रत पर्यवेक्षक मुनिश्री जय कुमार ध्वजारोहण को समय से संपन्न कराने हेतु प्रांगड़ में पहुंच चुके थे। तभी सूचना मिली कि गुवाहाटी के स्थानीय विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य पहुंचने वाले हैं। बामुश्किल 2-3 मिनट में विधायक सिद्धार्थ आ गए और उनकी उपस्थिति में सुबह 9ः07 बजे मुनिश्री के मंगल पाठ के साथ ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न हो गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी सम्पतमल नाहाटा, अणुव्रत विश्व भारती के महामंत्री संचित जैन एवं अणुव्रत शिक्षक संसद के अध्यक्ष उत्तमचंद पगारिया, अणुव्रत महासमिति के पूर्व अध्यक्ष बाबूलाल गोलछा, निर्वतमान अध्यक्ष डालचंद कोठारी, प्रेक्षाध्यान के पूर्व संपादक अशोक संचेती एवं रमेश काण्डपाल समेत तमाम पदाधिकारी मौजूद थे।

प्रातः 9.11 बजे
असम के पूर्व सीएम प्रफुल मेहन्ता अपने चिर परिचित अंदाज में जेड सुरक्षा के साथ लगभग सवा नौ बजे आए। अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन,एडवोकेट और महामंत्री अरुण संचेती ने सैकड़ों सदस्यों के साथ उनका स्वागत किया। प्रफुल मेहन्ता ने आचार्यश्री महाश्रमण जी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने गुरूदेव से लगभग 15 मिनट तक बातचीत की।

प्रातः 9.23 बजे
आचार्यश्री के दर्शनों के बाद नशा मुक्ति अभियान प्रभारी अणुव्रत महासमिति राकेश नाहटा ने पूर्व सीएम से नशा मुक्ति अभियान का संकल्प-पत्र भरवाया।
प्रातः 9.25 बजे
प्रफुल मेहन्ता ने अणुव्रत के कार्यकारी संपादक अजय शर्मा से मुलाकात में कहा कि अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी समाज सुधारक के रूप में समाज को उचित दिशा देने का काम कर रहे हैं।

प्रतिनिधि परिचय एवं केन्द्रीय सत्र की प्रस्तुति :
इस सत्र में अणुव्रत की चारों केन्द्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चिंतन किया। इस सत्र के दौरान सभी प्र्रतिनिधियों ने अपना-अपना परिचय दिया और अपनी संस्थागत उपलिब्धयों से अवगत करवाया।

दोपहर 12.00 बजे
लगभग पांच सौ कार्यकर्ताओं से खचाखच भरा हुआ सभागार सदस्यों के बैठने के लिए छोटा पड़ गया। सभागार में मंच पर आसीन होने वालों में अणुव्रत की चारों केन्द्रीय संस्थाओं के अध्यक्ष और महामंत्रियों के अलावा निर्वतमान अध्यक्ष डालचंद कोठारी, पूर्व अध्यक्ष बाबूलाल गोलछा थे। कार्यक्रम के सूत्रधार मर्यादा कोठारी ने बहुत ही मनमोहक ढंग से संचालन शुरू किया। उन्होंने क्रमानुसार सभी का परिचय सदस्यों से करवाया।

दोपहर 12ः20 बजे
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री जयकुमारजी के मंगलपाठ से हुआ। तत्पश्चात अणुव्रत के सदस्यों ने अणुव्रत गीत
नैतिकता की सुर सरिता में जन जन मन पावन हो।
संयममय जीवन हो.....................श् का संगान किया।

इसके बाद अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन, एडवोकेट ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सभी का तहेदिल से स्वागत किया। अध्यक्ष महोदय ने कहा कि आज मेरे कार्यकाल को एक वर्ष पूरा हो रहा है। जिसमें सभी का भरपूर सहयोग मिला। महामंत्री अरुण संचेती ने तीनों केन्द्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों का स्वागत किया। महामंत्री ने अपने एक वर्षीय कार्यकाल पर कहा कि यह एक साल का सफर बहुत ही अच्छा रहा। महामंत्री के बाद सभी पदाधिकारियों ने क्रमानुसार अपना परिचय एवं संक्षिप्त वक्तव्य दिया। जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल से जुड़े कुछ अविस्मरणीय अनुभवों को साझा किया।

अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी सम्पतमल नाहाटा ने न्यास के कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। अणुव्रत विश्व भारती के महामंत्री संचय जैन ने ग्लोबल लेवल पर किए जाने कार्यों के बारे में सदस्यों को अवगत कराया। उन्होंने आगे बताया कि किस तरह जैन परिपेक्ष्य में अहिंसा और करुणा पर नई पीढ़ी को केन्द्र में रखते हुए वे कार्यरत हैं।

अणुव्रत शिक्षक संसद से हीरालाल श्रीमाली ने शिक्षक संसद की कार्यप्रणाली पर रोशनी डालते हुए कहा कि बिहार में नशे की प्रवृति बहुत ज्यादा है इस पर भी हमें काम करना चाहिए।
अणुव्रत शिक्षक संसद के अध्यक्ष उत्तमचंद पगारिया ने अहिंसा, नैतिकता और संयम को मानव जीवन के लिए आवश्यक बताया।

अणुव्रत समिति दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. पी.सी. जैन ने आचार्यश्री तुलसी के द्वारा अणुव्रत की स्थापना और आंदोलन के प्रति समर्पण भावना को याद करते हुए कहा कि अणुव्रत आंदोलन एक नैतिक जन-चेतना अभियान है। यह लोगों में सहिष्णुता की भावना का विकास करता है। इस संगोष्ठी का समापन रमेश काण्डपाल के आभार ज्ञापन से हुआ।


द्वितीय सत्र
दोपहर 2 बजे
विषय : प्रभावी कैसे बने अणुव्रत का प्रचार प्रसार

अणुव्रत आंदोलन के प्रचार प्रसार को प्रभावी बनाने के लिए एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें इस बात पर चिंतन किया गया कि कैसे मीडिया के विभिन्न स्वरूपों का सदुपयोग किया जाए। मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकारों और लेखकों में वरिष्ठ पत्रकार एवं अणुव्रत पत्रिका के संपादक महेन्द्र जैन, कार्यकारी संपादक अजय शर्मा, प्रेक्षाध्यान के पूर्व संपादक अशोक संचेती, अणुव्रत महासमिति के सोशल मीडिया प्रभारी राजेश कांवड़ियां, वैब सह प्रभारी विनय लिंगा,  मुनिश्री कुमार श्रमण और अणुव्रत आध्यात्मिक पर्यवेक्षक प्रभारी मुनिश्री जयकुमार ने अपने विचारों से लोगों को लाभान्वित किया। इस कार्यक्रम के संयोजक थे अरुण संचेती।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री जयकुमार के मंगल पाठ से हुआ। इस मंथन गोष्ठी में सर्वप्रथम अणुव्रत पत्रिका के संपादक महेन्द्र जैन ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज अणुव्रत के प्रचार प्रसार में अणुव्रतियों की बढ़ती उदासीनता एक गंभीर विषय बनती जा रही है। युवा इससे दूर जा रहे हैं। यदि अणुव्रत पत्रिका को प्रोफेशनली और कमर्शियली चलाया जाए तो इसे व्यापक बनाया जा सकता है।

मंथन के प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए मुनिश्री कुमार श्रमण ने कहा कि मुझे इस हॉल में उपस्थित लोग अणुव्रती होने के बजाय अणुव्रती प्रेमी ज्यादा नजर आते हैं। मुनिश्री ने कहा कि आप लोग अणुव्रत को लेकर गंभीरता से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बड़े ही विस्मयपूर्ण भाव से कहा कि कभी-कभी तो दो संस्थाएं एक ही विषय पर काम करती नजर आती हैं। ऐसा भी देखने में आता है कि कार्यक्रम का आयोजन करो, होर्डिंग-पोस्टर लगाओ, फोटो खिचवाओ और जिम्मेदारी संपन्न।

मुनिश्री ने सभागार में उपस्थित सभी सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा कि मैं आपसे पूछता हूं कि आपने पिछले कुछ दिनों में कितने अणुव्रती बनाए। यहां पर मौजूद अणुव्रतियों में से क्या किसी को अणुव्रत आचार संहिता याद है? क्या मैं पूंछ लूं किसी से? आप प्रतिदिन कितने लोगों से अणुव्रत की चर्चा करते हैं? आप अधिवेशन में शामिल होने के लिए गुवाहाटी ट्रेन से, हवाई जहाज से आए हैं, क्या आपने यात्रा के दौरान अपने सहयात्रियों से इसके बारे में किसी भी प्रकार की चर्चा की? क्या आप अपने साथ अणुव्रत से संबधित साम्रगी अपने साथ लेकर चलते हैं। जो वक्त पड़ने पर मिलने वालों को दे सकें। आप लोग ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं। जबकि होना यह चाहिए कि आप लोगों को अणुव्रत कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन करने चाहिए। उसमें लोगों को सिखाया जाए, प्रशिक्षण दिया जाए कि वे लोग समाज में काम कैसे करें। जिससे अणुव्रत आंदोलन आगे बढ़े, इसे गति मिले। कार्यकर्ता गली मुहल्लों, घरों और बाजारों में जावें, लोगों से मिलें और अणुव्रत के बारे में बताएं।

मुनिश्री कुमार श्रमण ने नशा मुक्ति अभियान को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने नशा मुक्ति संकल्प -पत्र भरवाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संकल्प -पत्र भरवाने से कुछ नहीं होगा। 500 फॉर्म भरवा कर वाह-वाही लूटने से कुछ नहीं होने वाला। पहले लोगों को नशा मुक्ति के बारे में जागरूक करो, उनके अंदर संयम की भावना का विकास करो। फिर उनसे स्वेच्छा से नशा मुक्ति के फॉर्म भरवाए जाएं। हमें संख्या नहीं, गुणवत्ता चाहिए। अणुव्रतियों को विषय केन्द्रित होकर काम करना चाहिए। आप को अन्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली से सीखना चाहिए। अणुव्रती सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं इसलिए अन्ना हजारे और केजरीवाल जैसे लोग नेता बनकर हमारे बीच आ रहे हैं। यदि आचार्यश्री तुलसी के सि़द्धांतों को सही ढंग से प्रतिपादित किया होता तो समाज में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती और लोग खुशहाल होते।

मैंने अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन,एडवोकेट से कहा है कि सभी सदस्यों को गुवाहाटी के बाजार में लेकर जाएं और वहां पर स्थानीय लोगों से वार्ता करें, मुझे बड़ी हैरानी होती है कि जब मेरे पास खबरें आती हैं कि अमुक समिति ने कंबल बांटे, ब्लड डोनेशन कैम्प लगाया, अरे आपने नया क्या किया। यह काम तो रोटरी क्लब, लॉयस क्लब भी करता है। इसलिए भीड़ में शामिल न हो, केन्द्रीत होकर काम करें। मुझे उम्मीद है आप लोग कुछ सोचेगे इस विषय पर।

कार्यकारी संपादक अजय शर्मा ने प्रिंट मीडिया के विषय पर बोलते हुए कहा कि पहले तो यह समझना होगा कि प्रिंट मीडिया है क्या? अमूमन हम लोग न्यूज पेपर, मेगजीन, ब्रॉचर्स, पम्पलेट, पोस्टर को इस श्रेणी में रखते हैं। मैं प्रिंट मीडिया के इतिहास में नहीं जाउंगा कि 1780 में पहला न्यूज पेपर द बंगाल गजट छपा था। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता आज भी बरकरार है। लोगों के बीच इसकी पैठ आज भी कायम है। अजय शर्मा ने अणुव्रत के इतिहास को याद करते हुए कहा कि अणुव्रत आंदोलन की नींव में प्रिंट मीडिया की बहुत ही अहम भूमिका रही है, यह किसी से छिपा नहीं है। उस वक्त अणुव्रत आंदोलन को आचार्यश्री तुलसी ने लोगों के बीच पहुंचाने के लिए पिं्रट मीडिया का सार्थक उपयोग किया।
आज मीडिया के विभिन्न स्वरूप हैं या फिर यूं कह लीजिए आज हमारे पास बहुत से विकल्प हैं। हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया यानी कि टीवी न्यूज चैनल, रेडियो और न्यू मीडिया यानी कि वेब साइट, वेब पोर्टल, ब्लॉग और यू टयूब के सहारे सूचनाओं, जानकारियों और खबरों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। अब तो साहित्य भी न्यू मीडिया के जरिए हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा डिजीटल मीडिया भी आ गया है। यह एक तरह से प्रिंट मीडिया का ही एडवांस वर्जन है जो इंटरनेट के जरिए मोबाइल, टेबलेट या कंप्यूटर पर इस्तेमाल किया जाता है। डिजीटल मीडिया में आज आपको विजीटिंग कार्ड से लेकर ब्रॉचर्स, पोस्टर्स, होर्डिंग्स, मैगजीन तक उपलब्ध हैं। रही बात सोशल मीडिया की और उसकी लोकप्रियता की। तो उसको हम नकार नहीं सकते हैं। लेकिन जब बात आती है विश्वसनीयता की, तो उस पर सोशल मीडिया खरी नहीं उतर पाती है। इसकी साख यहां दांव पर लगी रहती है। इस पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं, जानकारियों और खबरों पर विश्वास नहीं करते हैं क्योंकि वो किसी पूर्वाग्रह से भरी भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया में फेसबुक और व्हाटसअप ने लोगों को विचारों की स्वतं़त्र अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम दिया है। आप यूं भी कह सकते हैं कि सोशल मीडिया बेलगाम है। जिसे कंट्रोल करने के लिए साइबर लॉ बनाया गया है। फेसबुक को भी अपने यूजर की आइडेन्टी और पोस्ट को लेकर सतर्कता और निगरानी बोर्ड बनाना पड़ा। तो ऐसे में इस पर अविश्वास के बादल छाए रहते हैं।

इसलिए लोग आज भी प्रिंट मीडिया पर ही भरोसा करते हैं। लोग न्यूज पेपर, मैगजीन और बुक्स को अध्ययन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। उसकी विश्वसनीयता पर किसी भी तरह की कोई आंच नहीं है।

मुनिश्री जय कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात बता रहे हैं। अब अणुव्रत के पुनः जीवन का समय आ गया है। उसे फिर से जन्म देना होगा। इस जन-जागरण बनाने हेतू आप लोग प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करें। आप लोगों से अपेक्षा है कि आप लोग अपने विचारों में ठहराव लाएं, जीवन में ठहराव लाएं। इसकी सख्त आवश्यकता है।

अणुव्रत प्रचेता एवं प्रेक्षाध्यान के पूर्व संपादक अशोक संचेती ने अणुव्रत दर्शन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अणुव्रत के प्रचार-प्रसार में इसका सही ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो आशातीत सफलता अवश्य मिलेगी।

सोशल मीडिया प्रभारी राजेश कांवड़ियां ने सोशल मीडिया की उपयोगिता पर रोशनी डालते हुए कहा कि आज के समय में लोगों से संवाद के मामले में फेसबुक, टिवटर और व्हाटस्अप उपयोगी और सार्थक टूल के रूप में उभरे हैं व इसके प्रयोग की भी जानकारी दी। यदि आप अभी भी इसके बारे में नहीं जानते हैं। तो आप इसका प्रयोग सीख लीजिए।

वेब सह-प्रभारी विनय लिंगा ने अणुव्रत महासमिति के वेब पोर्टल की जानकारी देते हुए कहा कि आने वाले समय में अणुव्रत पत्रिका के साथ-साथ यह भी एक महत्वपूर्ण माध्यम रहेगा।

चुर्तथ सत्र
शाम 4 बजे
विषय : नारी अस्मिता और अणुव्रत

संध्याकालीन सत्र में नारी अस्मिता और अणुव्रत पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस विचार गोष्ठी में साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी, साध्वीश्री कनकलता जी के सान्निध्य में वक्ताओं डॉ. कुसम लूनिया, माला कातरेला, प्रो. डॉ. ललिता बी जोगड़ और शांति सकलेचा ने अपने क्रांतिकारी विचारों से नारी शक्ति के पक्ष को रखा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अलका सांखला ने किया।

डॉ. कुसुम लूनिया ने वुमन करियर और सफल गृहणी के विषय पर बोलते हुए कहा कि आज के दौर में नारी घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने करियर में भी सफलता के झण्डे गाढ़ रही है। अपनी अस्मिता के लिए उसका संघर्ष किसी से छिपा नहीं है। इसके पक्ष में उन्होंने नारी शक्ति के कुछ उदाहरण भी दिए।

माला कातरेला ने कन्या भ्रूण हत्या पर बोलते हुए कहा कि लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या मानव जीवन के लिए अभिशाप है। यह एक मानसिक विकृति के समान है। जो लोगों को भ्रूण हत्या के लिए प्रेरित करता है। आज अपने देश में कहीं न कहीं कन्या भ्रूण हत्या की खबरें में सुनने और पढ़ने आती रहती हैं। मौजूदा स्थिति में आचार्यश्री तुलसी द्वारा प्रतिपादित अणुव्रत आचार संहिता का पहला नियम मैं भ्रूण हत्या नहीं करूंगा, जो लोगों को भ्रूण हत्या करने से रोकता है। यदि लोग अणुव्रत के व्रतों को धारण करें तो कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है।

शांति सकलेचा ने पुरूषों की विकृत मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि पुरूष स्त्री का सम्मान करना अपना अपमान समझता है। उसके अंदर पुरूषवादी अहं कूट-कूट कर भरा हुआ है। आप अपने आस-पास कहीं भी देख सकते हैं। घर से लेकर स्कूल कॉलेज, ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों तक, महिलाओं के साथ होने वाला अभद्र व्यवहार, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न आज की सबसे बड़ी समस्या है। इसका समाधान अणुव्रत आचार संहिता में निहित है। यदि कोई भी व्यक्ति अणुव्रत आचार संहिता का पालन करना शुरू कर दे। उसको अपने जीवन में उतार ले तो महिलाओं को सम्मान मिलना शुरू हो जाएगा। इसलिए हमारे समाज को चाहिए कि वह मनुष्यों में नैतिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करे। जिससे सभी में समता और समानता का भाव विकसित किया जा सके।

साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी ने स्त्री स्वाभिमान को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने पुरुष को पूरी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान से जीने के लिए प्रत्येक प्राणी को कोशिश करनी चाहिए। अतः प्रत्येक स्त्री को भी अपने सम्मान के लिए आवाज उठानी चाहिए। उसे संघर्ष करना चाहिए। साध्वीवर्या ने इस अवसर पर स्त्रियों को लेकर आचार्यश्री तुलसी के विचारों का उल्लेख किया।

रात्रि कालीन
पंचम सत्र : नैतिकता (सांस्कृतिक संध्या)
प्रथम सत्र के रात्रि कालीन सत्र में एक ललित कला एवं साहित्य पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के संयोजक हास्य और व्यंग्य कवि करन जैन थे। जिन्होंने अपनी बहुमूल्य प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए अणुव्रतियों का दिल जीत लिया। उन्होंने जीवन की वास्तविकता से ओत-प्रोत और व्यंग्यभरी कविताओं की बौछारों से लोगों को हंसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर दिया। इसके अलावा एक स्टेज नाटिका का भी आयोजन किया गया। जिसमें 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका विनोद कोठारी और अंत में आभार ज्ञापन अरुण संचेती ने दिया।

द्वितीय दिन 22 अगस्त 2016
आज का दिन सुबह 5 बजे गुरु वंदना से शुरू हुआ। प्रातः कालीन सत्र प्रेक्षाध्यान के अभ्यास के लिए रखा गया था। जिसके अंतर्गत उपस्थित श्रद्धालुओं और अणुव्रतियों को जीवन दर्शन के बारे में बताया गया।

सुबह 8ः45 बजे
साध्वी प्रमुखाश्री कनकप्रभा जी के सान्निध्य में एक संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें उन्होंने संयम की महत्ता पर प्रकाश पर डालते हुए कहा कि सभी मानवों को अपने व्यवहार और खान-पान पर संयम रखना चाहिए। शादी समारोह जैसे समारोह में खाने-पीने के व्यंजनों से लेकर अन्य संसाधनों पर संयम बरतना चाहिए। दिखावे और आडंबर का परित्याग करें। अणुव्रत को जीवन में अपनाने से परिवार और समाज का ढांचा बदल सकता है। इस दौरान उन्होंने आचार्यश्री तुलसी के जीवन दर्शन को याद करते हुए उपस्थित लोगों को जागरूक करने का प्रयत्न किया। आभार ज्ञापन महासमिति के अध्यक्ष सुरेंन्द्र जैन, एडवोकेट ने किया।
ः छठा सत्र
सुबह 9ः20 बजे
विषय
 नशा नशे का द्वार
इस विषय पर साध्वीश्री विश्रुतप्रभा जी ने अपने क्रांतिकारी और ओजस्वी विचारों से उपस्थित श्रोताओं को जागरूक करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति का आभा मंडल भी कांतिहीन हो जाता है। नशा करने वाला मनुष्य विवेकहीन हो जाता है। उसका मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास नहीं हो पाता है। उन्होंने इसके लिए मुगल बादशाह बाबर की शराब की लत को लेकर एक प्रेरणास्पद कहानी श्रोताओं को सुनाई। बाबर किस तरह शराब की बुरी आदत की वजह से बार-बार शिकस्त का सामना कर रहा था। जब बाबर को लगा कि उसकी कमजोरी और हार की मुख्य वजह शराब है। तो उसने तुरंत शराब पीना छोड़ दिया और अपने सैनिकों के लिए भी शराब प्रतिबंधित कर दी। ऐसा करते ही बाबर ने अपने प्रतिद्वंदी पर जीत हासिल कर ली। इसके बाद बाबर ने हिन्दुस्तान में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। जिसके बाद उसकी आने वाली पीढ़ियों ने 300 साल तक शासन किया। लेकिन जहांगीर ने व्यसन से ग्रसित होकर पूरे मुगल साम्राज्य को डूबो दिया। उन्होंने श्रोताओं को नशे के दुश्परिणामों के बारे में भी बताया।

सुबह 10ः20
मुनिश्री महावीर ने प्रवचन स्थल से श्रोताओं को एक प्रेरणास्पद भजन सुनाया। जिसके बोल थे
‘‘भारत के लोगों जागो,
जीवन में संयम अपनाओ’’

सुबह 10ः25
अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणरजी ने अपना प्रवचन इस प्रश्न के साथ शुरु किया कि दुख क्यों पैदा होता है?
उत्तर - कामांध वृत्ति से दुख पैदा होता है। पदार्थों की आसक्ति से दुख पैदा होता है। इस विषय में कैसे जागरूक रहना चाहिए। इसके लिए गुरुदेव ने भगवान गौतम बुद्ध का उदाहरण दिया। ऐसे ही अणुव्रत के कार्यकर्ताओं का अणुव्रत के क्षेत्र में कार्य करना उनका धर्म है, कर्तव्य है। अणुव्रतों को अध्ययन करना चाहिए। उन्हें ज्ञान बढ़ाना चाहिए। गुरुदेव ने साधुओं को भी नसीहत देते हुए जागरूक किया कि साधुओं को आराम तलबी नहीं होना चाहिए। आचार्य तुलसी कितनी मेहनत करते थे। वे कितनी यात्राएं करते थे। उन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों यात्राएं की। वे चातुर्मास का आयोजन, साधु व साध्वी का नियोजन करते थे। वे बिना थके वृद्धावस्था में भी यात्राएं करते थे। पूरे देश में, राज्यों में, नगरों में 70 वर्ष की आयु के बाद भी 9 वर्षों तक यात्राएं करते रहे।

आचार्यश्री ने साधुओं के लिए यह भी कहा कि साधु को कभी स्त्री के प्रेमपाश में नहीं बंधना चाहिए। वो साधु ही क्या जो स्त्री के प्रेमपाश में बंध जाए। कामांध हो जाए। शरीर की सुकुमारता में नहीं फंसना चाहिए। वहीं गृहस्थ को स्त्री के साथ सामंजस्य बनाकर रखना चाहिए। सीमा से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अणुव्रत की साधना करने वाले को ब्रहमचर्य की साधना, संयम करना चाहिए। अणुव्रती को पर स्त्रीगमन, वेश्यावृत्ति नहीं करनी चाहिए। अणुव्रत का पालन करने वाले का कल्याण होता है।


प्रातः 10.54 बजे
अंत में साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी ने मनुष्य की बुरी आदतों पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि हमारी बुरी आदतें, बुरे संस्कार आत्मा को पीड़ित करते हैं। अपने दोषों को छिपाना और दूसरों को छलना पीड़ा देने वाला है। भाषा में सरलता होनी चिहए। वाणी में सरलता होती है तो व्यक्ति किसी को ठग नहीं सकता। व्यक्ति को अंतस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धर्म आराधना करनी चाहिए।

प्रातः 11.03 बजे
माला कातरेला ने पूज्य प्रवर गुरुदेव के सानिनध्य में अपने तमिल संस्करण पुस्तक ‘रोज की एक सलाह’ के बारे में उपस्थित लोगों को बताया। गुरूदेव ने माला कातरेला को उनके इस कार्य के लिए आशीर्वाद दिया।

प्रातः 11.05 बजे
इस कार्यक्रम में आचार्यश्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे बिलासीपाड़ा (असम) विधायक अशोक सिंघी ने कहा कि अणुव्रत आंदोलन असप्रांदायिक व नैतिक आंदोलन है। मानव जीवन की आचार संहिता है। आज के मौजूदा हालात में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। अणुव्रत एक कवच बन सकता है। उन्होंने ने आगे कहा कि-मैं आचार्यश्री से आशीर्वाद लेने आया हूं ताकि मैं सामाजिक परिवर्तन और समाज सुधार में भूमिका निभा सकूं।

विधायक ने कहा कि-क्या हम वाकई तेरापंथी हैं? क्या हम वाकई अणुव्रती हैं? यह एक गंभीर सवाल है। हमारा देश आज नशा व पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। इसके लिए अणुव्रत एक समाधान हो सकता है। आज स्कूलों में ड्रग की आदत बढ़ती जा रही है। इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। विधायक अशोक सिंघी के भाषण पर कटाक्ष करते हुए मुनिश्री दिनेश कुमार ने कहा कि भाषण देना ही, काम करना आता है। कार्यक्रम के अंत में आचार्यश्री महाश्रमण के द्वारा मंगल पाठ किया गया।

प्रातः 11.25 बजे बीजेपी विधायक अशोक सिंघी से खास मुलाकात
बिलासीपाड़ा (असम) विधायक अशोक सिंघी से अणुव्रत पत्रिका के कार्यकारी संपादक से एक खास मुलाकात हुई। जिसमें उन्होंने अणुव्रती बनने की इच्छा जाहिर की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि आपको अभी थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा। तो पेश है इसी मुलाकात के कुछ प्रमुख अंश :

संपादक- अणुव्रत के प्रचार-प्रसार के लिए आप स्थानीय स्तर पर क्या कर रहे हैं?
विधायक- अभी तो मैं कुछ भी नहीं कर रहा हूं लेकिन भविष्य में योजना है। वैसे भी, मैं अभी अणुव्रत से जुड़ा हुआ नहीं हूं। मैं तेरापंथी हूं, लेकिन मैं अणुव्रत से जुड़ना चाहता हूं।
संपादक-यदि आप अणुव्रत से जुड़ना चाहते हैं और उसके लिए कुछ करना भी चाहते हैं तो आपने आज अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सम्मुख अणुव्रती बनने की इच्छा की सार्वजनिक घोषणा क्यों नहीं की?
विधायक- क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि कोई इस घोषणा को राजनीतिक पैंतरा समझे। मैं अपने विरोधियों को किसी भी तरह का मौका नहीं देना चाहता। समय आने पर घोषणा करूंगा। अभी आने वाले समय में अनुशास्ता हमारी तरफ आ रहे हैं। मैं वहीं अणुव्रत से जुड़ने की घोषणा करूंगा।

सांतवा सत्र विषय : मैं भी हूं अणुव्रती
मैं भी अणुव्रती संगोष्ठी में प्रबुद्ध वर्ग के लोगों के विचार सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग सभागार में एकत्रित हुए। संगोष्ठी का शुभारंभ अणुव्रत गीत से हुआ। जिसे अणुव्रत समिति दिल्ली के सदस्यों ने गाया। मुख्य वक्ताओं के रूप में मुनिश्री कीर्ति कुमार, मुनिश्री जय कुमार, समाजसेवी हेमभाई, दिव्य ज्योति सेठिया, तमिलनाडू से मठाधीश नयन भटटाचार्य, दिलीप राजपाल और डॉ. पी.सी. जैन थे। इस संगोष्ठी में चारों केन्द्रीय संस्थाओं के अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने मंच के दाएं तरफ अपना स्थान ग्रहण किया था। कार्यक्रम के सूत्रधार बने अणुव्रत समिति गुवाहाटी अध्यक्ष निर्मल सामसुखा।

अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन एडवोकेट ने स्वागत भाषण में कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि अणुव्रत आंदोलन से जुड़ा हूं और मैं सभी मेहमानों का स्वागत करता हूं। हेमभाई असम में उग्रवाद के रास्ते पर चल रहे भटके हुए युवाओं को अहिंसा और शांति के प्रति जागरूक कर रहे हैं। वो उन्हें जीवन की मुख्य धारा में वापस लाने का प्रयास पिछले कई दशकों से कर रहे हैं।

इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने अपने विचारों से लोगों को लाभांवित किया, जो इस प्रकार है :
अणुव्रत समिति दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. पी.सी. जैन ने अणुव्रत में समाहित प्रमाणिकता की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ सभी से यही कहना चाहता हूं कि आप अपने व्यवहार से, बातों से दुनिया को बता दें कि मैं भी अणुव्रती हूं। आज हम यह संकल्प ले कि अणुव्रत को एक विशाल आंदोलन बना देंगे। आज हमारे स्कूल में 60 प्रतिशत अवार्ड लड़कियों को जाते हैं इसके पीछे बहुत मेहनत की गई है। पीसी जैन ने नई जनरेशन के बारे में बोलते हुए कहा कि स्टूडेंट को चार्ज किया जाए। उन्हें फ्रीडम दी जाए। वे जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आए। अणुव्रत में हमें एक सोच डालनी है, एक सोच पैदा करनी है कि किस तरह का जीवन जीने से वह अपने स्कूल-कॉलेज के बाद अपने 40 साल अच्छे से जी सकता है। यह भावना पैदा करनी होगी।

दिव्य ज्योति ने दुनिया की मौजूदा परिस्थितियों का आंकलन करते हुए कहा कि आप जो काम करते हैं वह अणुव्रत का काम है, इसलिए आप सभी अणुव्रती हैं। लोग हथियार उठा रहे हैं, आतंकवादी बन रहे हैं अपने धर्म के नाम पर कि अपना धर्म ही बेहतर है। वह अपने धर्म के नाम पर सीधे स्वर्ग में जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि आज एक सवाल उठ रहा है कि धर्म क्या है? मानव धर्म है। मानवता के खिलाफ जाएंगे। क्या यही धर्म है। नई पीढ़ी के लिए कैसे काम करें, यह सोचना होगा। बिहार, छत्तीसगढ़ में नशा मुक्ति पर अच्छा काम चल रहा है। जब तक हम खुद नहीं सुधरेंगे तब तक कुछ नहीं होगा। भ्रूण हत्या पर अणुव्रत ने बहुत ही जबरदस्त कदम उठाया है। असम में भ्रूण हत्या कम हैं लेकिन हरियाणा में ज्यादा है। भ्रूण हत्या के लिए माताएं भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। आप मानवता पर काम करें। जब मानवता ही नहीं होगी तो काम करके क्या होगा। मेरा आप से अनुरोध है कि आप लोग अंधविश्वास पर भी काम करें।

मुनिश्री कीर्ति कुमार ने कहा कि मैं भी अणुव्रती हूं कहने की बजाए यह कहना चाहिए कि मुझे गर्व है कि मैं अणुव्रती हूं। मुनिश्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमें अणुव्रत का प्रचारक बनना है। हमें ऐसे व्यक्ति का निर्माण करने की आवश्यकता है जिसे देखकर या जिससे मिलकर लोग कहे कि अणुव्रती आ गया। उन्होंने कहा कि अणुव्रत के प्रचारक स्थाई होने चाहिए। चाहे कितने भी अध्यक्ष या पदाधिकारी आ जाए या बदल जाएं लेकिन प्रचारक न बदले जाएं।

अणुव्रत पुरस्कार से सम्मानित हेमभाई ने कहा कि मेरे मन में विचारों का समुद्र मंथन चल रहा है। सभी धर्मों ने धर्म के लिए अस्त्र उठाया लेकिन जैन धर्म ऐसा धर्म है जिसने कभी अस्त्र नहीं उठाया। आईएसआईएस जैसे संगठनों के मामले में शांति और अहिंसा के लिए जैन धर्म को आगे आना चाहिए।

मठाधीश नयन भट्टाचार्य ने अपनी मातृभाषा में ईश्वर की वंदना के साथ अपना वक्तव्य अंग्रेजी में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने आचार्यश्री तुलसी के संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचार व सिद्धांत आज भी प्रांसगिक हैं। जब आचार्यश्री तमिलनाडू आए थे। मैं उनसे मिला था। वह मेरी जिदंगी का टर्निंग पाइंट था। उन्होंने तमिल भाषा में अणुव्रत और जैन दर्शन के अनुवाद की तारीफ की। मठाधीश ने सभी लोगों को तमिलनाडू आने का न्यौता दिया।

दिलीप राजपाल पंचमण्डल सदस्य, अणुव्रत महासमिति ने कहा कि मैं भी अणुव्रत के लिए क्या कर रहा हूं? मैं सभी धर्मों के सम्मेलनों में जाता हूं। तो वहां मैं आचार्यश्री तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ और वर्तमान आचार्यश्री महाश्रमण के बारे में बताता हूं।

अणुव्रत आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनिश्री जय कुमार ने संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए कहा कि मैं भी अणुव्रती हूं, तो मैं हूं ही लेकिन मैं महाव्रती भी हूं। हम ऐसा व्रत लें कि हमारे अंदर अहिंसक, नैतिक चेतना जागृत हो। उन्होंने हेमभाई के विचारों का स्वागत किया। यदि व्यक्ति में मानसिक संबल हो, तो कुछ भी संभव है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सभी को नियमित रूप से अणुव्रत आचार संहिता का पाठ करना चाहिए। यह सभी धर्मों का सार है। यह भगवान महावीर, भगवान बुद्ध को जानने और पढ़ने के समान है। आप अणुव्रत को जीए यही मेरी अपेक्षा है। भगवान महावीर के उपदेशों व सिद्धांतों को पढे़ तथा उनका जागरूकता को लेकर दिया गया सिद्धांत भी अवश्य पढ़ें और उसका अनुसरण अपने जीवन में करें।

आंठवा सत्र : साधारण सभा की बैठक
दोपहर के सत्र में अणुव्रत की केन्द्रीय संस्थाओं की साधारण सभा की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रतिनिधियों की अच्छी उपस्थिति रही। बैठक में संचालन की जिम्मेदारी विनोद कोठारी ने निभाई और मंच की शोभा बढ़ाई अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन-एडवोकेट, महामंत्री अरुण संचेती, कोषाध्यक्ष मक्खन लाल गोयल, उपाध्यक्ष मर्यादा कुमार कोठारी, प्रबंध संपादक लाजपत राय जैन, निर्वतमान अध्यक्ष डालचंद कोठारी, अणुव्रत शिक्षक संसद के अध्यक्ष उत्तम चंद पगारिया, अणुव्रत विश्व भारती के अध्यक्ष निर्मल एम. रांका, अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी संपतमल नाहाटा, महामंत्री संचय जैन इत्यादि। बैठक का शुभारंभ अणुव्रत समिति दिल्ली के 15 सदस्यों ने अणुव्रत गीत ;संयममय जीवन होद्ध का संगान किया। गीत गाते हुए डॉ. पी.सी. जैन और डॉ. धनपत लूनिया थोड़े से भावुक हो गए। निर्वतमान अध्यक्ष अणुव्रत महासमिति डालचंद कोठारी ने उपस्थित सभी सदस्यों को पुनः संकल्पित किया।

अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन ने स्वागत भाषण में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि आज मेरे कार्यकाल को पूरा एक वर्ष हो गया है। जिम्मेदारियों के निर्वहन में पता ही नहीं चला कि कब एक साल हो गया। अपने से अपने पर अनुशासन इस परिभाषा को सार्थक सिद्ध करना है। मेरा आप सभी से निवेदन है कि बंधुओं अणुव्रत को हम अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। सबसे ज्यादा प्रबुद्ध लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना है। अधिवेशन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था एवं तकलीफ के लिए खेद है लेकिन आप अणुव्रती हैं।

इसके बाद अणुव्रत महासमिति के पदाधिकारियों ने निर्वतमान अध्यक्ष डालचंद कोठारी और महामंत्री मर्यादा कोठारी का सम्मान किया गया।

संगोष्ठी के क्रम में आगे बढ़ते हुए महासमिति के सहमंत्री कन्हैयालाल चिप्पड़ ने पिछली साधारण सभा ;विराट नगर नेपाल की रिपोर्ट पढ़कर सुनाई। इसके बाद महामंत्री अरुण संचेती ने प्रतिवेदन की प्रस्तुति दी जिसे सभी सदस्यों ने ओम अर्हम की ध्वनि के साथ पारित किया।
अरुण संचेती ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज अणुव्रत ने वैश्विक स्तर पर एक सर्वमान्य पहचान बनाई है। मुझे याद है जब सुरेन्द्र जी ने फोन पर मुझे मिलने का निमंत्रण दिया और उसके बाद आचार्यश्री महाश्रमण से मंगल पाठ सुनने के बाद अणुव्रत की जिम्मेदारी निभानी शुरू की, वह यात्रा आज भी बिना थके जारी है। मैं महामंत्री पद की जिम्मेदारी के लिए अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन के साथ मौजूद सभी पदाधिकारियों का आभारी हूं।

कोषाध्यक्ष मक्खन लाल गोयल ने गतवर्ष का आय-व्यय का ब्यौरा सदन के समक्ष प्रस्तुत किया। साथ ही आगामी वर्ष के लिए योजना प्रस्तुत की। जिसे स्वीकार कर लिया गया।

अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन-एडवोकेट ने कहा कि हमने अपनी समिमियों को जो मासिक प्रकल्प दिए, निर्देश दिए, उनका बखूबी पालन किया गया लेकिन वही कुछ ने उदासीनता की चादर ओढ़े रखी। कुछ समितियों ने व्यवस्थित रिपोर्ट नहीं भेजी। यह एक चिंता का विषय है।

सक्रिय समितियों के क्रम में प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहने वाली समितियों के नाम इस तरह हैं। प्रथम स्थान पर अणुव्रत समिति दिल्ली, द्वितीय स्थान पर बंगलूरू और भिवानी और तृतीय स्थान पर रही अणुव्रत समिति गुवाहटी, चैन्नई और मुंबई। प्रोत्साहन स्वरूप सिरसा, भीलवाड़ा, सूरत-उधना, मोमासर, हिसार, और उदयपुर। वहीं सर्वश्रेष्ठ समिति के पायदान पर रही अणुव्रत समिति सिलीगुड़ी।

इसी क्रम में सक्रिय सदस्यों की बात करें तो सिर्फ 6 सदस्य ही ऐसे रहे जो पूर्ण रूप से सक्रिय थे। हमने पांच सदस्यों को निरस्त भी किया है। इनके स्थान पर नये सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।

विशेष सक्रिय सदस्यों में कार्यालय प्रभारी शांतिलाल पटावरी, सोशल मीडिया प्रभारी राजेश कांवड़ियां, अणुव्रत पत्रिका के प्रबंध संपादक लाजपत राय जैन, अहिंसा समवाय प्रभारी डॉ. बी.एन. पाण्डे, डॉ. कुसुम लूनिया और अणुव्रत पत्रिका अभिवृद्धि अभियान प्रभारी कुंदनमल तलेसरा रहे। आंचलिक प्रभारी के रूप में उदीत चोरड़िया (बिहार), पंकज डागा को सोशल मीडिया में सहभागिता के लिए, ओम प्रकाश जैन (सिरसा), शांति सकलेचा (बैंगलोर) से अणुव्रत पत्रिका के क्षेत्रिय प्रकाशन के लिए और सुभाष जैन-भिवानी को अणुव्रत पत्रिका के लिए सदस्य बनाने हेतु सम्मानित किया गया।

अणुव्रत महासमिति ने स्लोगन और आलेख प्रतियोगिता के लिए प्रवृष्टियां मंगवाईं थी। इस प्रतियोगिता में पांच स्लोगन को सर्वश्रेष्ठ और सात को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आलेख प्रतियोगिता में 4 को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दिया गया।

बैठक को आगे बढ़ाते हुए संचालक विनोद कोठारी ने अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। अणुव्रत न्यास की तरफ से शांति कुमार जैन ने प्रतिवेदन पढ़कर सुनाया।

इसके बाद अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष ने मुनिश्री जय कुमार के तीन सुझावों पर चर्चा की। ये तीन थे
महासमिति एक स्कूल गोद ले।
सभी अणुव्रती दिन में एक बार अणुव्रत आचार संहिता का वाचन करें।
प्रत्येक महीने के चौथे रविवार को सभी केन्द्रीय संस्थाओं की मीटिंग हो।

एक सुझाव महासमिति के अध्यक्ष की तरफ से था। सभी अणुव्रत सदस्यों के लिए पत्रिका की अभिवृद्धि के लिए 200 रूपए वार्षिक सदस्यता शुल्क रखा जाए। जिससे सभी को अणुव्रत से संबधित जानकारी मिलती रहे। इन सभी सुझावों को बैठक में मौजूद सदस्यों ने ओम अर्हम की ध्वनि से पारित किया।

बैठक में अणुव्रत पत्रिका विज्ञापन प्रभारी कन्हैया लाल चिप्पड़ ने मौजूद लोगों को विज्ञापन शुल्क और नीतियों के बारे में बताया। इसके बाद सभी सम्मानित सदस्यों के लिए सवाल जवाब या जिज्ञासा समाधान का सत्र रखा गया। कुछ चुनिंदा सवाल या जिज्ञासाएं इस प्रकार है :-

प्रश्न- दान किस रूप में ले सकते हैं।
जवाब- अध्यक्ष महोदय ने समाधान दिया कि आप चैक या कैश दोनों रूप में दान प्राप्त कर सकते हैं।

शांति सकलेचा का सुझाव था कि अणुव्रत समिति को संगठन मूलक संस्था घोषित किया जाए।
समाधान- इस सुझाव को अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष ने एक सिरे से नकार दिया।

अणुव्रत समिति भीलवाड़ा ने सुझाव दिया कि वर्षभर में हम कोई मेगा प्रोजक्ट लें। जिसके लिए उन्होंने एक साथ पूरे देश भर में पौधा रोपण का उदाहरण दिया। साथ ही उन्होंने चाय विक्रेता का भी जिक्र किया कि वह अपनी चाय के वितरण में अणुव्रत आचार संहिता के रेपर इस्तेमाल करता है, तो क्या हम उसे रेपर सप्लाई कर सकते हैं?
जवाब- सुरेन्द्र जैन ने कहा कि इसके बारे में गुरूदेव से चर्चा की जाएगी।

डॉ. अलका सांखला ने सुझाव दिया कि अणुव्रत समिति के सभी बैनर एक जैसे हो। इसके लिए बैनर का प्रारूप केन्द्र से ही बनकर आए।
जवाब अध्यक्ष- इस पर विचार किया जाएगा।

सवाल जवाब के सत्र के बाद सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए बैठक का समापन हुआ।


नौवां सत्र :
विषय - अणुव्रत कल, आज और कल
अणुव्रत कल आज और कल संगोष्ठी का आयोजन अणुव्रत के सुनहरे इतिहास और उज्जवल भविष्य पर मंथन को ध्यान में रखते हुए किया गया। सबसे पहले अणुव्रत महासमिति के निर्वतमान अध्यक्ष डालचंद कोठारी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि  अणुव्रत की क्या अपेक्षा है एवं अणुव्रत का प्रर्वतन कैसे हुआ, इस विषय पर उन्होंने अणुव्रत के इतिहास और महात्मा गांधी के अहिंसावादी सिंद्धांतों का जिक्र किया।

प्रो. सोहनलाल तिवारी ने कहा कि अणुव्रत एक लाइफ स्टाइल है। यह हर समस्या का समाधान है। जैसे मोदी ने योग को आज इंटरनेशनल बना दिया है ठीक उसी तरह अणुव्रत को भी इंटरनेशनल बनाया जाना चाहिए। अणुव्रत मानवता की बात करता है। अणुव्रत दर्शन के साथ-साथ आचार मीमांसा भी है।

संगठन मंत्री गौतम डागा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कल जो बोया गया था, उसका फल आज हम खा रहे हैं। वहीं आने वाली पीढ़ी उम्मीद कर रही है कि हम उनके लिए कुछ बो जाएं। जिसका वो लाभ उठा सकें। उन्होंने इसके लिए आचार्यश्री तुलसी की साउथ यात्रा के दौरान बने एक अणुव्रती के संस्मरण को सुनाया।

इस तरह अणुव्रत कल, आज और कल की विचार संगोष्ठी संपन्न हुई, जिसमें सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखें।

रात्रिकालीन दसवां सत्र अणुव्रत प्रश्न मंच प्रतियोगिता :
इस सत्र में अणुव्रत प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका उददेश्य था अणुव्रतियों का हल्का फुल्का मनोरंजन करने के अलावा अणुव्रत के ज्ञान का परीक्षण करना। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुसुम लूनिया और डॉ. हंसा संचेती ने किया। सूत्रधार की भूमिका निभाई सहमंत्री रमेश बंसल ने। कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष और महामंत्री की गरिमागयी उपस्थिति रही। निर्णायक की भूमिका में प्रो. डॉ. ललिता बी जोगड़, कार्यकारी संपादक अजय शर्मा और न्यास से रमेश काण्डपाल रहे।
इस प्रतियोगिता में 9 टीमों ने अपने-अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया। माला कातरेला की ‘संयम’ टीम प्रथम पुरस्कार विजेता रही। वहीं ‘प्रेरणा’ टीम अपना खाता भी नहीं खोल पाई और उसे शून्य अंक से ही संतोष करना पड़ा। इस प्रतियोगिता के दौरान टीमों के अलावा दर्शकों ने भी प्रश्नों के जवाबों में सहभागिता निभाई, उनका ज्ञान टीमों के प्रतिभागियों से ज्यादा था। विजेता दर्शकों एवं प्रतिभागियों को सम्मनित किया गया।

साधारण सभा की समीक्षा बैठक के दौरान घोषित किए गए सदस्यों, प्रतियोगियों और समितियों को सम्मानित करते हुए कार्यक्रम का समापन सकुशल संपन्न हुआ।

23 अगस्त 2016 अधिवेशन समापन एवं निष्पत्ति सत्र :
प्रतिदिन की तरह ही आज के दिन भी सभी कार्यकर्ताओं में जोश और उर्जा बरकार थी। सभी प्रातः 4ः30 बजे अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शनों के लिए पहुंचे । तदुपरांत प्रातः 5ः30 बजे योग और प्रेक्षाध्यान की कक्षा के बाद सभी लोग अधिवेशन के समापन की तैयारियों में जुट गयें।

प्रातः लगभग 9ः30 बजे प्रवचन पंडाल अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में समापन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्री लक्ष्मीलाल गांधी-भीलवाड़ा एवं मदनलाल धोका-कांकरोली को अणुव्रत सेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया एवं अणुव्रत लेखक पुरस्कार-2016 के लिए डॉ. दिलीप धींग (उदयपुर, राजस्थान) के नाम की घोषणा की गई।

कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन-एडवोकेट, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के प्रबंध न्यासी सम्पतमल नाहाटा, अणुव्रत प्रवक्ता डॉ. महेन्द्र कर्णावट और अणुव्रत पुरस्कार से सम्मानित हेमभाई की विशेष उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन रमेश बंसल ने किया।

डॉ. महेन्द्र कर्णावट ने अणुव्रत के संस्मरण पर बोलते हुए कहा कि जब मुनिश्री राकेश कुमार को पता चला कि अहिंसा हार गई और हिंसा जीत गई, तो उन्होंने कहा कि इस पर मेरे विचार अलग हैं। अहिंसक शक्तियां एकजुट हों और राष्ट्रहित, समाजहित में काम करे। उन्होंने अणुव्रत के इतिहास की चर्चा करते हुए कुछ संस्मरणों को गुरुदेव के समक्ष दोहराया।

डॉ. महेन्द्र कर्णावट ने हेमभाई के कार्यां की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक सफल प्रयास कर रहे हैं। मेरी मंगल कामना है कि आपके प्रयास और यात्रा सफल हो। आभार ज्ञापन सम्पतमल नाहाटा ने किया। इसके बाद अणुव्रत अहिंसा अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार विजेता हेमभाई को गुरूदेव की उपस्थिति में सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन, एडवोकेट ने आए हुए प्रस्तावों को अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री के समक्ष प्रस्तुत किया और समापन वक्तव्य दिया। आए हुए प्रस्तावों पर गुरुदेव ने अपना आशीर्वाद देकर सहमति प्रदान की। अधिवेशन समापन की औपचारिक घोषणा सहमंत्री रमेश बंसल ने की। यहां से सभी कार्यकताओं ने निष्पत्ति कार्यक्रम के लिए सभागार का रूख किया।

निष्पत्ति सत्र :
सैकड़ों कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे हुआ सभागार में सभी की निगाहें मंच की ओर लगी हुई थी। अणुव्रत महासमिति के सहमं़त्री कन्हैया लाल चिप्पड़ ने सूत्रधार की भूमिका संभाली।

कार्यसमिति सदस्य अणुव्रत महासमिति सरदारअली पड़िहार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि आपने नैतिक कार्य किए हैं तो आप अणुव्रती हैं अन्यथा नहीं। जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे। इसलिए अच्छा सोचो। अणुव्रत जातिप्रथा, सांप्रदायवाद को मिटाता है। चिप्पड़ जी ने कहा, शादी समारोह जैसे आयोजनों के दौरान अणुवत आचार संहिता बटवाएं। अणुव्रत दिल्ली समिति की मंत्री डॉ. कुसुम लूनिया ने महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन, एडवोकेट के सम्मान में कविता पाठ किया। वहीं माला कातरेला ने सुरेन्द्र जैन को शानदार प्रबंधन के लिए साधुवाद दिया।
अणुव्रत समिति गुवाहाटी के अध्यक्ष निर्मल सामसुखा ने समापन वक्तव्य में कहा कि हमने अच्छी सुविधाएं देने का प्रयास किया। फिर भी यदि कोई त्रुटि रह गई हो, असुविधा हुई हो, तो उसके लिए हमें खेद है। सह-प्रभारी नशामुक्ति प्रकल्प रमेश चौधरी ने कहा कि नशामुक्ति फॉर्म अच्छे से भरकर भेजें। अणुव्रत समिति दिल्ली की मीता शर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि मैं अणुव्रत का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं आज जो कुछ भी हूं और जो आज इस मंच पर खड़ी हूं। वो अणुव्रत की वजह से हूं। मीता ने श्रोताओं को एक कविता भी सुनाई।

निष्पत्ति कार्यक्रम में ही सिंहस्थ प्रकल्प-2016 के सफल आयोजन के लिए विजय वोरा-संयोजक प्रकल्प, गौतम कोठारी और दिलीप राजपाल को सम्मानित किया गया। अणुव्रत समिति गुवाहटी की कनक भंसाली और सुशील डागा एवं आवास व्यवस्था के लिए अणुव्रत समिति गुवाहाटी अध्यक्ष निर्मल सामसुखा, नशामुक्ति प्रभारी राकेश नाहटा को विशेष सहयोगी (एक लाख का अनुदान) हेतु सम्मानित किया गया।

सुबोध कोठारी, अधिवेशन संयोजक को सम्मानित किया गया। इस मौके पर सुबोध कोठारी ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि सुशील डागा के अनुभवों का फायदा मिला। साथ ही राजेन्द्र दोशी के अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद।

राष्ट्रीय अणुव्रत शिक्षक संसद संस्थान के महामंत्री राजेश सुराणा ने बोलते हुए कहा कि - मनुष्य में दो तरह की प्रवृत्ति होती है। मानवता और पशुता। अणुव्रत बदलने का दर्शन है। कार्यक्रमों का स्वरूप अच्छा कैसे हो, इस पर विचार करने की आवश्यकता है। अणुविभा के महामंत्री संचय जैन ने कहा कि किस तरह अणुव्रत को व्यापकता दें इस पर चिंतन करना है। इस प्रयास के लिए मैं समर्पित हूं।

कार्यसमिति सदस्य अणुव्रत महासमिति रतनलाल सुराणा ने आचार्यश्री तुलसी को याद करते हुए एक कविता का पाठ किया।

कार्यक्रम में अणुव्रत सेवी पुरस्कार से पुरस्कृत लक्ष्मीलाल गांधी ने भावुक होते हुए कहा कि आज का दिन मेरे लिए ना भूलने वाला दिन है। इसके लिए सभी का धन्यवाद।

मुनिश्री अशोक कुमार ने कहा कि-क्या हमारी फिर से वापसी राजनीतिक मंच पर नहीं हो सकती? क्या इस तरह के मंचों पर चर्चा नहीं हो सकती? क्या असम की विधानसभा में गुरुदेव की अहिंसा यात्रा की चर्चा नहीं हो सकती? यहां के बोडो ने भी अहिंसा यात्रा को सम्मान दिया। बंगाल में भी अहिंसा यात्रा को सम्मान मिला और उस पर चर्चा हुई। यह अच्छी बात है कि अणुव्रत आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनिश्री जयकुमार अणुव्रत को एक व्यवस्थित रूप देना चाहते हैं। मुनिश्री ने अणुव्रत और अहिंसा के बारे में अपने संस्मरण उपस्थित सदस्यों को सुनाए। उन्होंने अणुव्रतियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बिहार और बंगाल की यात्रा के बारे में एक रूपरेखा बनाई जाए और असम में अहिंसा की अलख जगाई जाए। इसको लेकर आप गंभीरता से काम करें, ऐसी अपेक्षा है।

कार्यक्रम के समापन की ओर बढ़ते हुए अणुव्रत समिति गुवाहाटी ने अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन एडवोकेट और महामंत्री अरुण संचेती को उनके समस्त पदाधिकारियों समेत सम्मानित किया। इस भावुक विदाई के अवसर पर अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन ने कहा कि कुल 13 सत्र चलें, हमने बहुत से सुझाव और प्रस्ताव रखे। जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई है, फैसला हुआ है। उस पर कार्य करें। ऐसी हमारी उम्मीद है। चारों संयुक्त केन्द्रीय संस्थाओं के समन्वय से यह कार्यक्रम हुआ है। भविष्य में ‘अणुव्रत गौरव’ के रूप में भी सम्मानित करने की योजना है। इसके बारे में आपको बताया जाएगा। अंत में किसी भी असुविधा के लिए खेद एवं क्षमा। साथ ही अणुव्रत आध्यात्मिक मुनिश्री जयकुमार के प्रति कृतज्ञता।

समापन और निष्पत्ति कार्यक्रम को विराम देते हुए अणुव्रत पर्यवेक्षक और चिंतक मुनिश्री जयुकुमार ने कहा कि जब तक मंथन चिंतन नहीं होता है। तब तक नवनीत नहीं होता है। इस नवनीत का बोध पूरे साल तक बना रहे। तभी हम अणुव्रत के लिए काम कर पाएंगे। अणुव्रत के लिए जुनून दिखाई देना चाहिए।

मुनिश्री ने आगे कहा कि जो स्कूल गोद लेने का प्रस्ताव मैंने आपको दिया था। उसका जल्द से जल्द एक प्रारूप बना लिया जाए। स्कूलों को एक ही सामग्री भेजी जाएगी। स्कूल गोद लेने और क्रियान्वयन की संपूर्ण जिम्मेदारी अणुव्रत महासमिति की होगी। अणुव्रत स्कूल गोद ले और उसे आदर्श स्कूल बनाए।
2 नं. सभी को अणुव्रत आचार संहिता कण्ठस्थ हो, एक पुस्तिका जेब में भी हो। अणुव्रत को जीएं। आपका आभा मण्डल स्वयं बताएगा। आरएसएस की तर्ज पर अणुव्रत की नई शाखाएं चलाई जाएं। कुछ प्रतियोगिताएं भी करवाई जाएं। अणुव्रत के आदर्श बनें। जय अणुव्रत, जय अणुव्रत। सभी केन्द्रीय संस्थाएं साधुवाद की पात्र हैं।

कार्यक्रम के सूत्रधार एवं अणुव्रत महासमिति के सहमंत्री कन्हैया लाल चिप्पड़ ने कहा कि मुनिवर की प्रेरणा व उर्जा से विदा ले रहे हैं। सहमंत्री रमेश बंसल ने आभार ज्ञापन किया। अधिवेशन में अच्छी सहभागिता रही एवं समस्त कार्यक्रम सानंद संपन्न हुए, सभी ने नई ऊर्जा के साथ अणुव्रत के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए विदा ली।