Thursday, January 21, 2016

दलित छात्र रोहित की आत्महत्या को मत बनाइए सियासत की चाल

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला के द्वारा आत्महत्या के मामले को राजनीतिक रंग देने की मैं घोर निंदा करता हूं। यह सर्वथा अनुचित है कि इस मामले को बढ़ा चढ़ा कर दिखाने की जो कोशिश की जा रही है। यह देशहित में नहीं है। यह समाज को रूग्ण करने का प्रयास है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने छात्र की आत्महत्या को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए देश के प्रधानमंत्री  मोदी को निशाना बनाया। दिल्ली मुख्यमंत्री किस तरह की राजनीति कर रहे हैं। उन्हें अपने राज्य के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। उनसे इतनी परिपक्वता की तो आशा की जा सकती है कि वह एक छात्र की आत्महत्या को मुद्दा नहीं बनाएंगे। अरविंद केजरीवाल अपने राजधर्म का पालन करें और राज्य में अमन चैन कायम रखने की कोशिश करें। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी से उम्मीद करता हूं कि वह अपने बयानों पर नियंत्रण रखें। दिग्विजय सिंह का बयान खेदजनक है। बिना किसी ठोस सबूत के इस तरह की बयान बाजी देशहित में तो नहीं हो सकती।

जबकि नवयुवकों के द्वारा आत्महत्या जैसे कमजोर फैसलों पर चिंतन की सख्त आवश्यकता है।आखिरकार क्या वजह है कि नौजवान युवक और युवतियां आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं? ये लोग मानसिक और भावनात्मक स्तर पर इतने क्षीण हैं कि किसी भी परिस्थिति का सामना करने की बजाय  आात्महत्या कर लेते हैं। इसकी स्पष्ट वजह है शिक्षा नीति में अपरिपक्वता। हमारी शिक्षा नीति सिर्फ बाजारवाद पर आधारित शिक्षा प्रदान कर रही है। लेकिन जीवन को जीने की शिक्षा नहीं दे रही है। आजकल की युवा पीढ़ी एक कुशल उद्यमी तो है लेकिन सामाजिक रिश्तों और परिस्थितियों का सामना करने में अक्षम हंै। वह आर्थिक रूप से नये नये आयाम तो खोज सकती है परंतु बात जब समाज और परिवार की विषम परिस्थितियों की आती है तो इससे ज्यादा कमजोर प्राणी इस पृथ्वी पर कोई नहीं है। हमारी शिक्षा नीति में संस्कारों की उपेक्षा की जा रही है। बच्चे प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए मेरा प्रस्ताव है कि आप देश की शिक्षा नीति पर नये सिरे से सोचे। शिक्षा में संस्कारों और मूल्यों के विकास पर चिंतन करें। देश की शिक्षा नीति ऐसी हो कि युवा प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर सकें। वे मानसिक और भावनात्मक स्तर पर मजबूत हों।
जब युवा प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होगा। तभी देश और समाज के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वाह कर पाएगा। अन्यथा असमय ही मृत्यु या फिर कुंठाग्रस्त जीवन जीने के लिए मजबूर होगा।

No comments:

Post a Comment